
रायपुर। प्रदेश अधिकारी कर्मचारी संघ छत्तीसगढ़ की प्रांतीय सामान्य सभा की बैठक में संगठन के विस्तार और नई जिम्मेदारियों को लेकर कई अहम फैसले लिए गए। बैठक में इंद्रावती भवन में पदस्थ दुलेश्री कुर्रे को महिला प्रकोष्ठ का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया। संगठन ने इसे कर्मचारी संगठनों के इतिहास में पहली बार इंद्रावती भवन में पदस्थ किसी महिला कर्मचारी को प्रांतीय नेतृत्व देने का कदम बताया है।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष करण सिंह अटरिया ने कहा कि अब तक कर्मचारी संगठनों में महिला कर्मचारियों को इस स्तर पर नेतृत्व का अवसर नहीं मिला है। उनके मुताबिक, इंद्रावती भवन में काम करने वाली महिला कर्मचारी को प्रदेश स्तर पर जिम्मेदारी देने वाला उनका संगठन पहला है। उन्होंने कहा कि इससे महिला कर्मचारियों की समस्याओं को संगठन के स्तर पर और मजबूती से उठाने में मदद मिलेगी।
बैठक में बस्तर संभाग को भी संगठन में जगह दी गई। कांकेर जिला मबाविवि की पर्यवेक्षक रमेसरी टंडन को महिला एवं बाल विकास विभाग के विभागीय प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। इसके साथ ही संगठन ने राजपत्रित अधिकारियों के लिए अलग प्रकोष्ठ में विहारी लाल पटेल को अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी।
इंद्रावती भवन स्थित वित्त विभाग में पदस्थ जितेन्द्र सिंह ठाकुर को प्रदेश का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया। वहीं रायपुर संभाग से महेश कुमार पांडोरिया को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई। सभी नियुक्तियों के प्रस्ताव प्रदेश अध्यक्ष की ओर से रखे गए, जिन्हें बैठक में मौजूद सदस्यों ने ध्वनिमत से मंजूरी दी।
संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि महिला नेतृत्व बढ़ने से इंद्रावती भवन समेत प्रदेशभर में काम कर रही महिला कर्मचारियों की समस्याओं को संगठन के जरिए सरकार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। खासकर महिला कर्मचारियों से जुड़े विभागीय और सेवा संबंधी मामलों को प्रदेश स्तर पर उठाने के लिए महिला प्रकोष्ठ को सक्रिय किया जाएगा।
बैठक में संगठन सचिव गीता बड़गे, रायपुर जिला अध्यक्ष केशरी प्रसाद कुशवाह, गरियाबंद जिला अध्यक्ष मनोज कुमार अटल सहित एसआर जाटव, राजेश कुमार वरकड़े, नवीन अग्रवाल, सुनील कुमार भूमरकर, चेतन कुमार साहू, पूजा पटेल, भीसम वारले और बेमेतरा से सुनील कुमार गायकवाड़ समेत बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।
नई नियुक्तियों के बाद संगठन अब प्रदेश स्तर पर अपने नेटवर्क को और मजबूत करने की तैयारी में है। खास तौर पर महिला कर्मचारियों को संगठन से जोड़ने और उनकी समस्याओं को एक मंच पर लाने की जिम्मेदारी महिला प्रकोष्ठ के सामने होगी।





