
रायपुर: छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल (हाउसिंग बोर्ड) अब केवल मकान बनाने तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले समय में यह संस्था सड़क, पुल, खेल परिसर, स्टेडियम, टाउन प्लानिंग और शहरी पुनर्विकास (रीडेवलपमेंट) जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर भी काम करेगी। नवा रायपुर के छत्तीसगढ़ संवाद ऑडिटोरियम में आयोजित राज्य स्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण कार्यशाला में वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने यह बात कही।
मंत्री चौधरी ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में हाउसिंग बोर्ड का लगभग 700 करोड़ रुपये का पुराना कर्ज समाप्त कर दिया गया है। इससे मंडल को बड़ी वित्तीय राहत मिली है और वह आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर है।
मांग और बुकिंग देखकर ही शुरू होंगे नए मकान
अक्सर बिना मांग के मकान बनाने और पूंजी फंसने की पुरानी समस्या पर बात करते हुए मंत्री ने कहा कि अब नियमों में सुधार किया गया है। नई व्यवस्था के तहत शुरुआती 3 महीने में 30 फीसदी या कुल 60 फीसदी बुकिंग मिलने पर ही टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इससे संस्था का पैसा बेकार नहीं फंसेगा।
दूसरे राज्यों के टेंडर भी भरेगा छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड
ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मंडल के पास बेहतरीन इंजीनियर और तकनीकी स्टाफ मौजूद है। अब बोर्ड को अपनी क्षमता बढ़ाकर राष्ट्रीय स्तर पर ले जाना होगा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे अगले दो सालों में छत्तीसगढ़ के बाहर दूसरे राज्यों की निर्माण निविदाओं में भी हिस्सा लेने का लक्ष्य बनाकर काम करें।
पीपीपी मॉडल से बची 94 एकड़ सरकारी जमीन
अधोसंरचना विकास के लिए पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर जोर देते हुए वित्त मंत्री ने सेरीखेड़ी प्रोजेक्ट का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि 800 करोड़ रुपये की इस परियोजना में पहले 218 एकड़ जमीन लगनी थी, लेकिन बेहतर प्लानिंग और प्रतिस्पर्धा के बाद यह काम महज 124 एकड़ में पूरा हो रहा है। इससे शासन की करीब 94 एकड़ बेशकीमती जमीन की बचत हुई।
18 महीनों में 8 हजार संपत्तियां बिकीं, 1800 करोड़ की कमाई
मंडल अध्यक्ष अनुराग सिंह देव ने कहा कि पिछले 18 महीनों में बोर्ड ने शानदार प्रदर्शन किया है। ‘वन टाइम सेटलमेंट’ (ओटीएस) योजना और बेहतर रणनीति की बदौलत करीब 8,000 पुरानी खाली संपत्तियां बिकी हैं, जिससे 1,800 करोड़ रुपये का राजस्व मिला है। साथ ही 2,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के नए प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है और दिसंबर में कई नई योजनाएं शुरू होंगी। उन्होंने बताया कि बोर्ड का लक्ष्य सभी 33 जिलों में आधुनिक टाउनशिप, ईवी चार्जिंग स्टेशन और पर्यावरण-अनुकूल कॉलोनियां विकसित करना है।
कार्यशाला में आईआईएम रायपुर, एनआईटी और ट्रिपल आईटी के विशेषज्ञों ने बोर्ड के अधिकारियों को आधुनिक निर्माण तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और वित्तीय जोखिम प्रबंधन के गुर सिखाए। कार्यक्रम में आवास एवं पर्यावरण सचिव अंकित आनंद, मंडल आयुक्त अवनीश शरण सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।





