
छत्तीसगढ़ में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। भारत सरकार के ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने बाजार में बिक रही एक इंजेक्शन दवा को गंभीर रूप से अवमानक घोषित किया है। वहीं रायपुर की सरकारी प्रयोगशाला की जांच में चार अन्य दवाएं भी मिथ्याछाप और अमानक पाई गई हैं। इसके बाद राज्य औषधि प्रशासन ने पूरे प्रदेश में अलर्ट जारी कर दिया है।
ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन निकला खतरनाक:
केंद्र सरकार को मिली जानकारी के अनुसार ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन आईपी 5 IU/ml (Tocin) का बैच नंबर I-7881 परीक्षण में फेल हो गया। जांच रिपोर्ट में इसे “ग्रॉसली नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी” यानी गंभीर रूप से अवमानक श्रेणी में रखा गया है। यह श्रेणी उन दवाओं के लिए उपयोग होती है जिनकी गुणवत्ता मरीजों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है।
लैब जांच में चार और दवाएं फेल:
खाद्य एवं औषधि परीक्षण प्रयोगशाला कालीबाड़ी रायपुर की जांच में चार अन्य दवाएं भी संदिग्ध पाई गई हैं। इनमें Matins Healthcare Pvt. Ltd की नाक्पेन-पी, Anon Pharmaceutical की फ्लामो स्टार-एपी, LV Lifesciences, VPO Gurumajra ACHE की पी और Go-Ish Remedies Ltd की कोल्डज़िया टैबलेट शामिल हैं। ये सभी दवाएं दर्द, बुखार और सर्दी-जुकाम जैसी सामान्य बीमारियों के उपचार में उपयोग की जाती हैं। जांच में इनके नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे।
निर्माता कंपनियों पर भी सवाल:
जांच रिपोर्ट में जिन दवाओं के बैच फेल पाए गए हैं, वे अलग-अलग कंपनियों के नाम से बाजार में बेची जा रही थीं। इनमें हरिद्वार, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश की निर्माण इकाइयों के नाम शामिल हैं। प्रारंभिक जांच में इन्हें मिथ्याछाप श्रेणी में रखा गया है, जिससे दवाओं की असल गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
प्रदेशभर में कार्रवाई के आदेश:
सूचना मिलते ही खाद्य एवं औषधि प्रशासन, छत्तीसगढ़ ने सभी जिला औषधि नियंत्रण अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं। अधिकारियों को कहा गया है कि वे मेडिकल स्टोर्स, थोक विक्रेताओं और अस्पतालों में विशेष जांच अभियान चलाएं। यदि संबंधित बैच की दवाएं कहीं भी उपलब्ध मिलती हैं तो उनके भंडारण, वितरण और बिक्री पर तत्काल रोक लगाई जाए।
दुकानदारों और अस्पतालों को चेतावनी:
विभाग ने राज्य के सभी दवा विक्रेताओं, थोक वितरकों और निजी एवं सरकारी अस्पतालों को संबंधित बैच नंबरों की जांच करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों ने कहा है कि इन दवाओं का उपयोग और विक्रय तुरंत बंद किया जाए तथा उपलब्ध स्टॉक की सूचना जिला औषधि नियंत्रण कार्यालय को दी जाए।
लोगों से भी सतर्क रहने की अपील:
खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने आम नागरिकों से भी सावधानी बरतने को कहा है। विभाग ने अपील की है कि लोग दवा खरीदते समय बैच नंबर अवश्य जांचें। यदि किसी के पास इन बैच नंबरों की दवाएं मौजूद हैं तो उनका सेवन न करें और इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को दें। किसी भी संदिग्ध दवा की सूचना मिलने पर प्रशासन तत्काल कार्रवाई करेगा।
स्वास्थ्य सुरक्षा पर बड़ा सवाल:
प्रदेश में एक साथ पांच दवाओं के अमानक और मिथ्याछाप पाए जाने से दवा निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी दवाएं मरीजों के उपचार को प्रभावित करने के साथ स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव भी डाल सकती हैं। ऐसे में बाजार में बिक रही दवाओं की नियमित जांच और सख्त निगरानी की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है।



