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छग में नक्सलियों को डेटोनेटर और पाउडर सप्लाई करते थे MP के पति-पत्नी

छग के युवक समेत दंपति को 7 साल की जेल, MP कनेक्शन भी जांच के घेरे में, जड़ी-बूटी की आड़ में पहुंचाते थे विस्फोटक

जड़ी-बूटी के सामान की आड़ में नक्सलियों तक विस्फोटक पहुंचाने की कोशिश का मामला अदालत में साबित हो गया। राज्य अन्वेषण अभिकरण (SIA) की जांच के बाद विशेष न्यायालय ने तीन आरोपियों को दोषी ठहराया। इनमें मध्यप्रदेश निवासी पति-पत्नी रवि मरकाम और चमेली बाई भी शामिल हैं। तीसरा आरोपी नारायणपुर का कोसरू वड्डे है। मामले में विस्फोटक सामग्री बरामद होने के साथ नक्सली सप्लाई नेटवर्क की कड़ी सामने आई थी।

मामला 19 मार्च 2024 का है। पुलिस को सूचना मिली थी कि तारागांव में कुछ लोग जड़ी-बूटी बेचने के नाम पर पहुंचे हैं। उनके पास मौजूद गठरियों में संदिग्ध सामग्री होने की जानकारी मिली। जांच में पुलिस ने उमरिया निवासी रवि मरकाम और छतरपुर निवासी चमेली बाई के कब्जे से चार डेटोनेटर, सात बोरी पोटेशियम नाइट्रेट और सात मीटर लाल कार्डेक्स वायर बरामद किया। दो मोबाइल भी जब्त किए गए।

पूछताछ और जांच आगे बढ़ी तो सप्लाई नेटवर्क की दूसरी कड़ी सामने आई। पूर्व में गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर SIA ने नारायणपुर के कोसरू वड्डे की तलाश की। जांच एजेंसी के अनुसार पूछताछ में उसने विस्फोटक सामग्री को माओवादी सप्लायर टीम और अन्य नक्सलियों तक पहुंचाने के लिए नारायणपुर से तारागांव ले जाने की बात बताई।

जांच एजेंसी ने आरोपियों के बयानों के साथ तकनीकी साक्ष्य भी जुटाए। कॉल डिटेल रिकॉर्ड के जरिए आरोपियों के बीच संपर्क की कड़ियों को खंगाला गया। इसके बाद कोसरू वड्डे को भी मामले में आरोपी बनाया गया। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायिक रिमांड पर भेजा गया और विवेचना पूरी कर विशेष न्यायालय में अभियोग पत्र पेश किया गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए नारायणपुर पुलिस से आगे की जांच SIA को सौंपी गई थी। एजेंसी ने गवाहों के बयान और जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों को अदालत के सामने रखा। विशेष न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को दोषी माना और अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाई।
आरोपियों को सात-सात वर्ष का सश्रम कारावास और एक-एक हजार रुपए जुर्माना लगाया गया। इसके अलावा प्रतिबंधित गतिविधियों से संबंधित धाराओं में दो से पांच वर्ष तक के सश्रम कारावास और जुर्माने की सजा भी सुनाई गई।

मामले में दो आरोपी मध्यप्रदेश से जुड़े हैं। रवि मरकाम उमरिया और चमेली बाई छतरपुर की रहने वाली हैं। ऐसे में जांच एजेंसी की नजर अब नक्सली नेटवर्क के उन संपर्कों पर भी है, जो दूसरे राज्यों से सामग्री या मदद पहुंचाने में भूमिका निभा सकते हैं। तारागांव का मामला नक्सलियों तक पहुंचने वाली सप्लाई लाइन की एक अहम कड़ी सामने लाता है।

नक्सल ऑपरेशन में केवल हथियारबंद दस्तों तक पहुंचना ही काफी नहीं होता। विस्फोटक, पैसा और दूसरी जरूरी सामग्री पहुंचाने वाला नेटवर्क भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इस मामले में जड़ी-बूटी की आड़ में विस्फोटक सामग्री पहुंचाने की कोशिश पकड़ी गई। तीन आरोपियों को सजा मिलने के बाद अब जांच एजेंसियों के सामने इस नेटवर्क से जुड़े बाकी संपर्कों तक पहुंचने की चुनौती है।

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