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धमतरी में प्रार्थना सभाओं पर बढ़ा तनाव, 40 चर्चों में गैर-ईसाइयों का प्रवेश बंद

चंगाई सभाओं पर धर्मांतरण के आरोपों के बीच क्रिश्चियन फोरम ने बाहरी लोगों पर लगाई रोक, शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए कलेक्ट्रेट में हुई बैठक।

रायपुर। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में प्रार्थना और तथाकथित चंगाई सभाओं को लेकर लंबे समय से जारी विवाद ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। लगातार बढ़ते सामाजिक तनाव, विरोध-प्रदर्शनों और धर्मांतरण के गंभीर आरोपों के बीच क्रिश्चियन फोरम ने एक बड़ा और अभूतपूर्व कदम उठाया है। फोरम ने जिले भर के करीब 40 चर्चों और नियमित प्रार्थना सभा स्थलों पर गैर-ईसाई समुदाय के लोगों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगाने का फैसला किया है। इस निर्णय के तत्काल क्रियान्वयन के तहत मेनोनाइट चर्च सहित कई प्रमुख प्रार्थना स्थलों के मुख्य द्वारों पर बाकायदा स्पष्ट सूचना बोर्ड भी चस्पा कर दिए गए हैं।

धर्मांतरण के आरोपों के बीच तनाव

धमतरी जिले में बीते कुछ महीनों से रविवार की प्रार्थना सभाओं और चंगाई सभाओं को लेकर विभिन्न हिंदू संगठनों द्वारा कड़ा विरोध दर्ज कराया जा रहा था। स्थानीय संगठनों का स्पष्ट आरोप है कि इन सभाओं की आड़ में भोले-भाले ग्रामीणों और कमजोर वर्ग के लोगों को भ्रमित कर अथवा प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराया जाता है। दूसरी तरफ, ईसाई समुदाय और संबंधित आयोजक इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते रहे हैं। आयोजकों का दावा है कि ये सभाएं केवल आत्मिक शांति और धार्मिक मान्यताओं के तहत आयोजित की जाती हैं, जिनमें किसी भी प्रकार का प्रलोभन या दबाव शामिल नहीं होता।

कलेक्ट्रेट तक पहुंचा था विवाद

यह विवाद उस समय और अधिक गहरा गया जब कलेक्ट्रेट परिसर में अचानक 1500 से अधिक लिखित आवेदन जमा किए गए। इन आवेदनों में लोगों ने यह उल्लेख किया था कि वे किसी दबाव या लालच में नहीं, बल्कि अपनी स्वेच्छा और व्यक्तिगत आस्था के चलते इन प्रार्थना सभाओं में शामिल होते हैं। बड़ी संख्या में पहुंचे इन आवेदनों के बाद जिले का सामाजिक और राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया। दोनों पक्षों के बीच तीखी बयानबाजी और शक्ति प्रदर्शन जैसी स्थितियां बनने लगीं, जिससे शांति भंग होने की आशंका उत्पन्न हो गई थी।

प्रशासन की पहल और शांति समिति की बैठक

जिले में संभावित टकराव और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल हस्तक्षेप किया। दोनों पक्षों के प्रमुख प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रबुद्ध नागरिकों को एक मंच पर लाने के लिए शांति समिति की एक विस्तृत बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में दोनों पक्षों से शांति, सौहार्द और कानून का पालन करने की अपील की गई। बैठक के बाद ही फोरम ने यह कड़ा कदम उठाने की घोषणा की, ताकि चर्च परिसरों में अनावश्यक भीड़ और विवाद की स्थिति से बचा जा सके।

फोरम का तर्क और आगामी सवाल

क्रिश्चियन फोरम के प्रतिनिधियों का कहना है कि बाहरी तत्वों के सभाओं में पहुंचने के कारण बेवजह तनाव और टकराव की स्थिति बन जाती है, जिसके चलते बार-बार पुलिस और प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ता है। शांति बनाए रखने और धर्मांतरण के झूठे आरोपों से बचने के उद्देश्य से ही केवल पंजीकृत सदस्यों को ही प्रवेश देने की नीति अपनाई गई है। हालांकि, चर्च परिसरों के बाहर लगे इन पाबंदी वाले बोर्डों ने एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या इस कदम से जिले का तनाव थमेगा या यह निर्णय दोनों समुदायों के बीच दूरियों को और अधिक बढ़ा देगा।

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