मंत्रालय बस में लगी भीषण आग, कूदकर भागे कर्मी; जर्जर वाहनों पर आंदोलन की तैयारी
सचिवालय परिसर के गेट पर कर्मचारियों से भरी बस धू-धू कर जली, चौदह साल पुराने वाहनों के संचालन पर कर्मचारी संघ ने जताई भारी नाराजगी।

रायपुर। मंत्रालय परिसर से कर्मचारियों को लेकर रवाना हुई एक स्टाफ बस में अचानक भीषण आग लग गई। बुधवार शाम करीब 5:30 बजे हुए इस हादसे से पूरे मंत्रालय परिसर में हड़कंप मच गया। कबीर नगर रूट पर चलने वाली इस बस में 30 से अधिक कर्मचारी सवार थे, जो शाम को अपने घर लौटने की तैयारी में थे। बस जैसे ही मंत्रालय के मुख्य गेट से महज 10 मीटर आगे बढ़ी, अचानक इंजन वाले हिस्से से तेज धुआं और आग की लपटें उठने लगीं।
गाड़ी के भीतर धुआं भरते ही चीख-पुकार मच गई। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए कर्मचारियों ने बिना देर किए बाहर की ओर दौड़ लगा दी। कई लोग दरवाजे की ओर भागे, जबकि कुछ कर्मचारियों ने आपात स्थिति में खिड़कियों से कूदकर अपनी जान बचाई। गनीमत रही कि सभी लोग समय रहते सुरक्षित बाहर निकलने में कामयाब रहे, जिससे एक बड़ा और दर्दनाक हादसा होने से टल गया।
धुआं और लपटें उठते देख परिसर में तैनात सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत मोर्चा संभाला। सुरक्षाबलों ने उपलब्ध अग्निशामक यंत्रों की मदद से लपटों को नियंत्रित करने का भरसक प्रयास किया, लेकिन आग इतनी तेजी से फैली कि लपटें बेकाबू हो गईं। आनन-फानन में फायर ब्रिगेड को सूचित किया गया। हालांकि, जब तक दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और पानी की बौछारें शुरू हुईं, तब तक पूरी बस जलकर खाक हो चुकी थी। घटना के कारण मंत्रालय के मुख्य द्वार पर काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
इस हादसे ने सचिवालयीन परिवहन व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। कर्मचारियों का कहना है कि जिस बस नंबर 3073 में आग लगी, उसका संचालन वर्ष 2012 से किया जा रहा है। करीब 14 साल बीत जाने के बाद भी इन जर्जर और पुरानी गाड़ियों को सेवा से नहीं हटाया गया है। कर्मियों का आरोप है कि बसों के रख-रखाव में भारी लापरवाही बरती जाती है। बारिश के दिनों में छतों से पानी टपकना और रास्ते में अचानक ब्रेकडाउन हो जाना आम बात हो चुकी है।
हादसे के बाद कर्मचारी संगठनों में गहरा आक्रोश फैल गया है। कर्मचारी प्रतिनिधियों ने सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। संघ का कहना है कि पुरानी और अनफिट बसों के संचालन को लेकर पहले भी कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन प्रशासन ने कभी कोई ठोस कदम नहीं उठाया। हर दिन सैकड़ों कर्मियों का जीवन ऐसी जर्जर बसों के भरोसे दांव पर लगाया जा रहा है।





