शहरों की तासीर के अनुसार बने विकास योजना, क्षमता संवर्धन और संसाधनों पर रहा जोर
नई दिल्ली में आयोजित कार्यशाला में नगरीय विकास की भावी रणनीतियों, वित्तीय संसाधनों के कुशल प्रबंधन और केंद्रीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर हुआ गहन मंथन।

शहरी क्षेत्रों के समग्र और सतत विकास के लिए अब स्थानीय पहचान, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप नीतियां तैयार की जा रही हैं। राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में आवास एवं नगर विकास निगम (हुडको) द्वारा ‘अर्बन चैलेंज फंड’ (यूसीएफ) विषय पर एक राष्ट्रीय क्षमता विकास कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में नगरीय निकायों के दीर्घकालिक कायाकल्प, तकनीकी दक्षता और आर्थिक सुदृढ़ीकरण की रूपरेखा पर विस्तृत विमर्श हुआ।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव ने कहा कि शहरों के सुनियोजित विकास के लिए केवल ढांचागत निर्माण पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रत्येक शहर की तासीर, संस्कृति और भौगोलिक आवश्यकताओं को समझना जरूरी है। औद्योगिक, धार्मिक, आध्यात्मिक, पर्यटन, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान रखने वाले नगरों के लिए एक समान नीति अपनाने के बजाय उनकी विशिष्ट प्रकृति के अनुरूप अलग-अलग विकास मॉडल बनाए जाने चाहिए। इससे न केवल स्थानीय आवश्यकताओं की पूर्ति होगी, बल्कि बुनियादी ढांचे का टिकाऊ विस्तार भी संभव हो सकेगा।
इस दौरान बेहतर वित्तीय प्रबंधन, संस्थागत क्षमता विस्तार और विभिन्न सरकारी योजनाओं के आपसी तालमेल पर विशेष बल दिया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि नगरीय निकायों को भविष्य की चुनौतियों, जनसंख्या के बढ़ते दबाव और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को ध्यान में रखकर अग्रिम योजनाएं बनानी होंगी।
दौरे के क्रम में केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक भी संपन्न हुई। इस बैठक में राज्य में संचालित प्रमुख केंद्रीय फ्लैगशिप योजनाओं की प्रगति, जमीनी क्रियान्वयन और भविष्य की रणनीतियों की गहन समीक्षा की गई। इसके अंतर्गत प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन, अमृत मिशन, पीएम स्वनिधि, पीएम ई-बस सेवा तथा अर्बन चैलेंज फंड के लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर सहमति बनी। साथ ही, निकायों के प्रशासनिक तंत्र को और अधिक मजबूत बनाने के उपायों पर भी चर्चा हुई।
इसके अतिरिक्त, हुडको के शीर्ष प्रबंधन और विशेषज्ञों के साथ आयोजित बैठक में कई नवाचारों को शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया। इसमें शहरों की मांग के आधार पर फूड पार्क की स्थापना, किफायती रेंटल हाउसिंग, पर्यटन स्थलों का विकास, झुग्गी (स्लम) बस्तियों का पुनर्विकास तथा ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को विकास के मास्टर प्लान में जोड़ने पर विमर्श हुआ। विभिन्न राज्यों में अपनाई जा रही सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों और उनके व्यावहारिक अनुभवों का अध्ययन कर उन्हें स्थानीय नीतियों में शामिल करने की रूपरेखा भी तैयार की गई।
हुडको प्रबंधन ने इन सभी नगरीय परियोजनाओं के लिए प्रारंभिक परियोजना प्रतिवेदन (पीपीआर) तैयार करने और तकनीकी सहयोग देने पर सहमति व्यक्त की है। राज्य और निकाय स्तर पर पदस्थ कर्मियों के कौशल संवर्धन के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे, जिससे विशिष्ट परियोजनाओं की पहचान और दस्तावेजीकरण में तेजी आए। विकास कार्यों को गति देने के लिए केंद्र और राज्य की योजनाओं के वित्तीय अभिसरण (कन्वर्जेंस) के माध्यम से नए आर्थिक स्रोतों को जुटाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।





