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साय सरकार बदलेगी जमीन के नियम, विकास और निवेश की राह होगी आसान

नई व्यवस्था में प्रतिबंधित कामों की सूची तय होगी, बाकी गतिविधियों को मंजूरी का रास्ता मिलेगा, आपत्ति और सुझाव के लिए 15 दिन मिलेंगे

छत्तीसगढ़ में अब जमीन के इस्तेमाल से जुड़े नियम बदलने की तैयारी है। राज्य सरकार ने करीब चार दशक पुराने छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में बदलाव का प्रस्ताव तैयार किया है। इसका सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि हर काम के लिए अलग-अलग मंजूरी की लंबी प्रक्रिया के बजाय प्रतिबंधित गतिविधियों की सूची तय की जाएगी। यानी जिस काम को Negative List में शामिल नहीं किया गया है, उसे संबंधित जमीन के उपयोग में अनुमति योग्य माना जाएगा।

पुराने नियमों की जगह नई सोच

सरकार का कहना है कि इसका मकसद नियम खत्म करना नहीं, बल्कि उन्हें आसान और साफ बनाना है। अभी जमीन के इस्तेमाल को लेकर कई तरह की अनुमति और शर्तों के कारण लोगों, कारोबारियों और निवेशकों को दिक्कत होती है। नई व्यवस्था में पहले से यह साफ होगा कि किस इलाके में कौन से काम नहीं किए जा सकते। बाकी गतिविधियों के लिए अनावश्यक रोक कम करने की कोशिश होगी।

चार साल पुराने नियमों में बड़ा बदलाव

छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में बदलाव का असर आवासीय, कारोबारी, औद्योगिक, कृषि, परिवहन और सार्वजनिक उपयोग वाली जमीन पर पड़ेगा। हर श्रेणी के लिए अलग Negative List तैयार की गई है। इससे आने वाले समय में शुरू होने वाली नई तरह की कारोबारी और सेवा गतिविधियों को भी जगह मिल सकेगी। सरकार इसे बदलती अर्थव्यवस्था के हिसाब से जमीन के इस्तेमाल को लचीला बनाने की कोशिश बता रही है।

रहवासी इलाकों में नहीं चलेगा सबकुछ

आवासीय जमीन पर प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग, बड़े गोदाम, कबाड़खाने, संक्रामक रोग अस्पताल, जेल, बड़े परिवहन टर्मिनल, थोक कारोबार, तेल डिपो, गैस गोदाम और खनन जैसी गतिविधियां प्रतिबंधित रहेंगी। डेयरी, कुक्कुट पालन, पशुपालन, मछली पालन और अंतिम संस्कार या कब्रिस्तान जैसी गतिविधियों को भी इस सूची में रखने का प्रस्ताव है। यानी नियम आसान होंगे, लेकिन रहवासी इलाकों की सुरक्षा से समझौता नहीं होगा।

कारोबारी जमीन पर भी तय होंगी सीमाएं

वाणिज्यिक जमीन के लिए भी साफ नियम बनाए जा रहे हैं। खतरनाक और जहरीले रसायनों या विस्फोटक पदार्थों का भंडारण, कुछ श्रेणी के प्रदूषणकारी उद्योग, पशुपालन, डेयरी, कुक्कुट पालन, मछली पालन, खनन और कुछ अन्य गतिविधियों को प्रतिबंधित रखने का प्रस्ताव है। इससे कारोबारी इलाकों में किस तरह की गतिविधियां हो सकती हैं, इसे लेकर ज्यादा स्पष्टता आएगी।

उद्योगों को मिलेगी अलग जमीन की पहचान

औद्योगिक जमीन पर पूरी तरह आवासीय टाउनशिप, स्कूल, संक्रामक रोग अस्पताल, जेल, बड़े परिवहन टर्मिनल, थोक व्यापार, तेल डिपो, गैस गोदाम और पर्यावरण के लिहाज से असंगत गतिविधियों को रोकने का प्रस्ताव है। कर्मचारी आवास जैसी जरूरतों को कुछ शर्तों के साथ जगह दी जा सकती है।

खेती की जमीन पर भी बंदिशें तय

कृषि उपयोग वाली जमीन पर बड़े व्यावसायिक परिसर, खतरनाक कारोबारी गतिविधियां, अलग-अलग श्रेणी के उद्योग, ज्यादा घनत्व वाली आवासीय योजनाएं और बड़े मॉल जैसी गतिविधियों को प्रतिबंधित रखने का प्रस्ताव है। इसका मकसद खेती की जमीन को अनियोजित व्यावसायिक इस्तेमाल से बचाना है।

नई गतिविधियों के लिए खुलेगा रास्ता

सरकार की दलील है कि अर्थव्यवस्था बदल रही है और नई तरह की सेवाएं, कारोबार और तकनीकी गतिविधियां सामने आ रही हैं। ऐसे में हर नई गतिविधि के लिए नियमों में अलग से बदलाव करने के बजाय केवल प्रतिबंधित कामों की सूची तय करना ज्यादा व्यावहारिक होगा। इससे निवेशकों को पहले से पता रहेगा कि कौन सा काम नहीं किया जा सकता और बाकी गतिविधियों के लिए रास्ता खुला रहेगा।

15 दिन में जनता दे सकेगी सुझाव

प्रस्तावित बदलाव अभी अंतिम नियम नहीं हैं। राजपत्र में प्रकाशन के बाद 15 दिन तक नागरिकों और संबंधित पक्षों से आपत्ति और सुझाव लिए जाएंगे। इसके बाद सरकार मिले सुझावों पर विचार करके नियमों को अंतिम रूप देगी। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि अंतिम नियमों में Negative List कितनी व्यापक रखी जाती है और जमीन के इस्तेमाल में वास्तव में कितनी आसानी मिलती है।

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