सीएम साय की पहल से नारायणपुर में 13 हजार बच्चों को रोज मिलेगा पोषण
अबूझमाड़ के 476 स्कूलों में नाश्ता योजना शुरू, आंगनबाड़ियों में बच्चों को पौष्टिक लड्डू भी बांटे जाएंगे

रायपुर, 11 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित और आदिवासी बहुल नारायणपुर जिले में बच्चों के कुपोषण के खिलाफ बड़ी पहल शुरू हुई है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 में जिले के 476 सरकारी स्कूलों के 13 हजार 15 बच्चों को अब हर दिन मुफ्त पौष्टिक नाश्ता मिलेगा। इसके साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को पौष्टिक लड्डू देने की योजना भी शुरू की गई है। सरकार का दावा है कि इस पहल से बच्चों के पोषण के साथ स्कूलों में उनकी नियमित उपस्थिति बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
13 हजार बच्चों को सीधा फायदा
नाश्ता योजना नारायणपुर और ओरछा यानी अबूझमाड़ विकासखंड के प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक स्कूलों में लागू की गई है। इन स्कूलों में पढ़ने वाले 13,015 बच्चों को रोजाना 150 ग्राम नाश्ता दिया जाएगा। खास बात यह है कि नाश्ते का मेन्यू भी पहले से तय किया गया है, ताकि बच्चों को सिर्फ पेट भरने का खाना नहीं बल्कि शरीर के लिए जरूरी पोषण भी मिल सके।
कभी पोहा तो कभी उपमा-दलिया
बच्चों को दिन के हिसाब से अलग-अलग नाश्ता मिलेगा। मेन्यू में पोहा-फलीदाना, सूजी का उपमा, दलिया, चना, खड़ा मूंग और मूंगफली जैसी चीजें शामिल हैं। इन खाद्य पदार्थों में प्रोटीन और दूसरे पोषक तत्व मौजूद हैं। दूरस्थ इलाकों के बच्चों के लिए यह व्यवस्था इसलिए भी अहम है, क्योंकि कई परिवारों में बच्चों को पर्याप्त और संतुलित भोजन नहीं मिल पाता।
रसोइयों को भी मिलेगा अतिरिक्त पैसा
स्कूलों में नाश्ता तैयार करने की जिम्मेदारी संभाल रहे 676 रसोइयों को हर महीने 800 रुपए अतिरिक्त मानदेय दिया जाएगा। इससे स्कूलों में नाश्ता तैयार करने और बांटने की व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश की गई है। सरकार की मंशा है कि योजना सिर्फ घोषणा बनकर न रह जाए, बल्कि स्कूलों में रोजाना तय मात्रा और गुणवत्ता के साथ बच्चों तक खाना पहुंचे।
आंगनबाड़ी में लड्डू से पोषण
स्कूलों के साथ छोटे बच्चों के पोषण पर भी फोकस किया गया है। जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में पौष्टिक लड्डू बांटने की शुरुआत की गई है। इसका मकसद कुपोषण से जूझ रहे बच्चों को अतिरिक्त पोषण देना है। यानी स्कूल जाने की उम्र से पहले ही बच्चों के खान-पान और स्वास्थ्य पर ध्यान देने की कोशिश की जा रही है।
सिर्फ खाना नहीं, स्कूल से जोड़ने की कोशिश
अबूझमाड़ जैसे दूरस्थ इलाके में बच्चों को स्कूल तक लाना और उन्हें लगातार स्कूल में बनाए रखना बड़ी चुनौती है। ऐसे में रोजाना मिलने वाला नाश्ता परिवारों के लिए भी राहत बन सकता है। सरकार को उम्मीद है कि पौष्टिक भोजन मिलने से बच्चों की स्कूल में उपस्थिति और ठहराव बढ़ेगा। साथ ही बच्चों को कुपोषण के दुष्चक्र से बाहर निकालने में मदद मिलेगी।
अब असली परीक्षा अमल की
योजना की घोषणा और शुरुआत के बाद सबसे बड़ी चुनौती इसे जमीन पर ठीक तरीके से चलाने की होगी। दूरदराज के स्कूलों तक रोजाना सामग्री पहुंचाना, तय मात्रा में नाश्ता देना और उसकी गुणवत्ता बनाए रखना जरूरी होगा। आंगनबाड़ी में बांटे जाने वाले लड्डुओं की गुणवत्ता और बच्चों तक वास्तविक लाभ पहुंचना भी निगरानी का विषय रहेगा। नारायणपुर जैसे संवेदनशील जिले में योजना कितनी असरदार साबित होती है, इसका पता आने वाले महीनों में बच्चों के पोषण और स्कूल उपस्थिति के आंकड़ों से चलेगा।





