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मुख्यमंत्री साय का सख्त आदेश, जर्जर भवनों की जांच में लापरवाही पर कार्रवाई

हॉस्टल, पीजी, स्कूल और कोचिंग सेंटरों का तत्काल सेफ्टी ऑडिट होगा, खतरा मिला तो समय रहते सुधार और जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई होगी

रायपुर। छत्तीसगढ़ में जर्जर और जोखिम वाले भवनों को लेकर सरकार अब हादसे का इंतजार नहीं करेगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सभी जिलों में हॉस्टल, पीजी, कोचिंग सेंटर, स्कूल और बड़े शैक्षणिक भवनों की तत्काल जांच कराने के निर्देश दिए हैं। पुराने और कमजोर भवनों की वास्तविक स्थिति देखी जाएगी। जहां खतरा मिला, वहां समय सीमा तय कर सुधार कराना होगा। जांच में लापरवाही सामने आई तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।

हादसे के बाद नहीं, पहले होगी कार्रवाई

मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि प्रशासन का काम सिर्फ दुर्घटना होने के बाद मौके पर पहुंचना नहीं है। जिस भवन से बच्चों या आम लोगों की जान को खतरा हो सकता है, उसकी पहचान पहले ही होनी चाहिए। ऐसे भवनों की जांच कर खतरा खत्म करने के लिए समय रहते कदम उठाने होंगे।

स्कूल और हॉस्टल पर खास नजर

स्कूल, छात्रावास, पुस्तकालय और दूसरी सार्वजनिक जगहों पर बने पुराने भवनों की भी जांच होगी। अगर कोई इमारत जर्जर है या उसके गिरने अथवा किसी दूसरे हादसे का खतरा है तो उसकी पहचान की जाएगी। विद्यार्थियों से जुड़े संस्थानों में सुरक्षा के नियमों से किसी तरह का समझौता नहीं करने को कहा गया है।

हॉस्टल और पीजी में रहने वाले विद्यार्थी भी इस जांच के दायरे में होंगे। कोचिंग सेंटर और बड़े शैक्षणिक भवनों की सुरक्षा भी देखी जाएगी। जांच सिर्फ कागजों में पूरी न हो, इसके लिए जिलों में लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

कलेक्टर-एसपी खुद करेंगे निगरानी

जिलों में इस काम की जिम्मेदारी तय करने के साथ कलेक्टर और एसपी को नियमित निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। सरकार चाहती है कि बैठक में दिए गए निर्देशों का असर जमीन पर दिखाई दे। केवल शिकायत आने के बाद कार्रवाई करने के बजाय लगातार निगरानी की व्यवस्था बनाने पर जोर दिया गया है।

शराब के अवैध कारोबार पर भी शिकंजा

बैठक में अवैध और मिलावटी शराब को लेकर भी सख्त निर्देश दिए गए। पुलिस, आबकारी और जिला प्रशासन मिलकर अभियान चलाएंगे। जिन जगहों पर शराब बनाने, रखने, बेचने या उसमें मिलावट की आशंका है, वहां संयुक्त टीम कार्रवाई करेगी।

दूसरे राज्यों से आने वाली शराब पर नजर

सीमावर्ती इलाकों और शराब के आने-जाने वाले रास्तों पर निगरानी बढ़ाने को कहा गया है। दूसरे राज्यों से अवैध शराब छत्तीसगढ़ में न पहुंचे, इसके लिए पुलिस और आबकारी विभाग के बीच लगातार सूचना साझा करने और संयुक्त कार्रवाई की व्यवस्था पर जोर दिया गया है।

लापरवाही मिली तो अफसर भी जिम्मेदार

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दो टूक कहा कि सरकारी निर्देशों की अनदेखी या लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं होगी। अगर जोखिम वाले भवन की जांच में लापरवाही हुई और बाद में हादसा हुआ, तो जिम्मेदारी तय की जाएगी। इसी तरह अवैध और मिलावटी शराब के खिलाफ कार्रवाई में ढिलाई मिलने पर भी जवाबदेही तय होगी।

सरकार का जोर अब हादसे के बाद राहत और जांच से ज्यादा हादसा रोकने पर है। आने वाले दिनों में स्कूलों, हॉस्टलों, पीजी, कोचिंग सेंटरों और पुराने सार्वजनिक भवनों की जांच से साफ होगा कि कितनी इमारतें वास्तव में सुरक्षित हैं और कितनी सिर्फ कागजों में ठीक बताई जा रही हैं।

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