
रायपुर। बस्तर में सड़क और पुल का काम लटकाने वाले ठेकेदारों पर सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। लोक निर्माण विभाग ने छह ठेकेदारों के पंजीयन का नवीनीकरण रोक दिया है। इनमें दो ठेकेदारों के पंजीयन पूरी तरह रद्द कर दिए गए हैं। कार्रवाई उन ठेकेदारों पर हुई है, जिनके काम बेहद धीमे चल रहे थे और बार-बार कहने के बाद भी काम पूरा करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई गई।
नोटिस के बाद भी काम नहीं
विभाग के मुताबिक ठेकेदारों को कई बार नोटिस दिए गए। काम पूरा करने के लिए अनुबंध की अवधि भी बढ़ाई गई। इसके बाद भी निर्माण की रफ्तार नहीं बढ़ी। कुछ ठेकेदारों ने काम पूरा करने का शपथ पत्र तक दिया, लेकिन मौके पर काम उसी तरह अटका रहा। इसके बाद विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए पंजीयन नवीनीकरण पर रोक लगा दी।
छह ठेकेदारों पर गिरी गाज
कार्रवाई की जद में के. मोहन रेड्डी, मेसर्स शांति विजय कन्सट्रक्शन, मेसर्स ट्रांसाफ्ट इंफ्रा., मेसर्स राघवा कन्सट्रक्शन, मेसर्स बालाजी इन्फ्रास्ट्रक्चर और मेसर्स पंकज हालदार आए हैं। इनमें के. मोहन रेड्डी और मेसर्स ट्रांसाफ्ट इंफ्रा. का पंजीयन रद्द कर दिया गया है। बाकी चार ठेकेदारों के पंजीयन का नवीनीकरण रोक दिया गया है।
सुकमा के काम सबसे ज्यादा प्रभावित
सुकमा में चिंतलनार-मरियागुड़म और कोंटा-गोलापल्ली सड़क के काम को लेकर कार्रवाई हुई है। राघवा कन्सट्रक्शन के पंजीयन का नवीनीकरण पांच साल के लिए रोक दिया गया है। ट्रांसाफ्ट इंफ्रा. के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई हुई है और उसका पंजीयन रद्द करते हुए पांच साल तक नवीनीकरण पर रोक लगाई गई है।
के. मोहन रेड्डी भेज्जी-चिंतागुफा और चिंतलनार-मरियागुड़म सड़क के काम से जुड़े थे। उनका पंजीयन भी रद्द कर दिया गया है। इसके साथ ही पांच साल तक दोबारा नवीनीकरण पर रोक लगाई गई है।
नारायणपुर के काम पर भी कार्रवाई
नारायणपुर-सोनपुर-मरोड़ा सड़क का काम कर रही मेसर्स शांति विजय कन्सट्रक्शन पर पांच साल की रोक लगाई गई है। इसी सड़क पर पुल-पुलिया का काम कर रहे मेसर्स पंकज हालदार के पंजीयन का भी पांच साल तक नवीनीकरण नहीं होगा।
कोंटा-गोलापल्ली सड़क के काम से जुड़े मेसर्स बालाजी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर दो साल की रोक लगाई गई है।
सड़कें अटकीं तो सरकार ने बदला रुख
बस्तर में सड़कें सिर्फ आवाजाही का साधन नहीं हैं। दूरदराज के इलाकों में सड़कें अस्पताल, बाजार, स्कूल और सरकारी सेवाओं तक पहुंच का बड़ा जरिया हैं। ऐसे में निर्माण में लगातार देरी का सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है। सरकार ने समीक्षा के बाद ऐसे ठेकेदारों पर कार्रवाई का फैसला लिया, जो बार-बार मौका मिलने के बावजूद काम पूरा नहीं कर सके।
हाईकोर्ट जाने की तैयारी भी
कार्रवाई को लेकर राज्य शासन ने बिलासपुर हाईकोर्ट में कैविएट भी दायर की है। यानी सरकार ने पहले ही यह तैयारी कर ली है कि अगर संबंधित ठेकेदार कार्रवाई को अदालत में चुनौती देते हैं तो उसका पक्ष सुना जाए। अब बस्तर की अधूरी सड़कों और पुलों को समय पर पूरा कराने की जिम्मेदारी आगे की प्रक्रिया पर होगी।





