
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग में नए नेतृत्व की तलाश तेज हो गई है। वर्तमान अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक का कार्यकाल 12 जुलाई को समाप्त होने जा रहा है। ऐसे में महिला एवं बाल विकास विभाग और सत्ता संगठन स्तर पर नए अध्यक्ष के नाम को लेकर मंथन शुरू हो गया है। राजनीतिक और सामाजिक हलकों में कई नाम चर्चा में हैं। इनमें संगठन, सामाजिक कार्य और कानूनी पृष्ठभूमि रखने वाली महिला नेताओं को प्रमुख दावेदार माना जा रहा है।
ममता साहू का नाम सबसे मजबूत दावेदारों में
चर्चा में सबसे प्रमुख नाम ममता साहू का बताया जा रहा है। पिछड़ा वर्ग से आने वाली ममता साहू को महिला आयोग के कामकाज का पुराना अनुभव है। वे पूर्व में आयोग की सदस्य रह चुकी हैं। महिला संबंधी मामलों की समझ, प्रशासनिक अनुभव और सौम्य व्यवहार उनकी सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है। कानूनी विषयों पर उनकी पकड़ भी मजबूत बताई जाती है। सामाजिक संतुलन और अनुभव के आधार पर उनका दावा मजबूत माना जा रहा है।
संगठन की पसंद बन सकती हैं विभा अवस्थी
भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष विभा अवस्थी का नाम भी चर्चा में है। वे वर्तमान में पार्टी के महिला संगठन का नेतृत्व कर रही हैं। संगठनात्मक अनुभव के साथ महिलाओं की समस्याओं को सुनने और उनके समाधान की क्षमता उनकी पहचान रही है। कानून की जानकारी और महिला मुद्दों पर सक्रियता उन्हें मजबूत दावेदार बनाती है। भाजपा संगठन ने उन्हें महिला मोर्चा की कमान सौंपी थी और वे प्रदेशभर में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
शैलेंद्री परगनिया भी दौड़ में
पूर्व जिला अध्यक्ष और जिला महामंत्री रह चुकी शैलेंद्री परगनिया का नाम भी संभावित दावेदारों में शामिल है। वे ओबीसी वर्ग से आती हैं और कानून की पढ़ाई कर चुकी हैं। संगठन और समाज के बीच लंबे समय तक काम करने का अनुभव उनके पक्ष में माना जा रहा है। पार्टी के भीतर भी उनकी स्वीकार्यता अच्छी बताई जाती है।
अनुभव के सहारे विभा राव की दावेदारी
पूर्व महिला आयोग अध्यक्ष विभा राव का नाम भी चर्चाओं में बना हुआ है। वे पहले दो बार आयोग की अध्यक्ष रह चुकी हैं। महिला मामलों और आयोग की कार्यप्रणाली का व्यापक अनुभव उनके पक्ष में है। हालांकि उनकी उम्र 60 वर्ष से अधिक हो चुकी है और सामान्य वर्ग से आने के कारण सामाजिक समीकरणों में यह उनके लिए चुनौती माना जा रहा है। फिर भी अनुभव उन्हें दौड़ से बाहर नहीं होने देता।
आदिवासी कार्ड चला तो दीपिका शौरी आगे
वर्तमान में महिला आयोग की सदस्य दीपिका शौरी भी संभावित नामों में शामिल हैं। वे बस्तर क्षेत्र से आती हैं और जनजातीय समाज में सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं। पिछले दो वर्षों से आयोग में सदस्य के रूप में कार्यरत हैं। यदि भाजपा सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन के तहत आदिवासी प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता देती है तो उनका दावा मजबूत हो सकता है।
सामाजिक समीकरण और अनुभव होंगे निर्णायक
सूत्रों के अनुसार सरकार इस बार अनुभव, संगठनात्मक क्षमता, कानूनी समझ और सामाजिक प्रतिनिधित्व के आधार पर निर्णय लेना चाहती है। ओबीसी, सामान्य और जनजातीय वर्ग के बीच संतुलन भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में अंतिम फैसला केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक संदेश देने वाला भी होगा।
जल्द हो सकता है नाम का ऐलान
महिला आयोग की वर्तमान अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक अभी अपने कार्यकाल का निर्वहन कर रही हैं। आयोग लगातार महिला उत्पीड़न और शिकायतों की सुनवाई कर रहा है। सूत्रों का कहना है कि कार्यकाल समाप्त होने से पहले सरकार नए अध्यक्ष के नाम पर अंतिम निर्णय ले सकती है। फिलहाल महिला राजनीति और सत्ता गलियारों में यही चर्चा है कि महिला आयोग की अगली कमान आखिर किसके हाथ में जाएगी।



