
छत्तीसगढ़ के बस्तर में अब डर और बारूद का धुआं छंट चुका है और वहां शांति की नई सुबह देखने को मिल रही है। यह सब मुमकिन हुआ है हमारे वीर जवानों के त्याग और शहादत की वजह से। यह बात मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शनिवार को रायपुर में आयोजित ‘शौर्यांजलि’ कार्यक्रम के दौरान कही।
द हिन्दू फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने बस्तर में कर्तव्य निभाते हुए जान गंवाने वाले 50 वीर जवानों को नमन किया और उनके परिजनों को सम्मानित किया। शहीदों के परिजनों से बात करते हुए मुख्यमंत्री भावुक नजर आए। उन्होंने कहा, “जब कोई जवान शहीद होता है तो मां का बेटा, पत्नी का सहारा और बच्चों के सिर से पिता का साया छिन जाता है। इस कमी को हम पूरा तो नहीं कर सकते, लेकिन सरकार हर सुख-दुख में इन परिवारों के साथ चट्टान की तरह खड़ी है। ये परिवार सिर्फ मदद के हकदार नहीं, बल्कि हमारे अपने परिवार का हिस्सा हैं।”
सीएम साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रणनीति से सुरक्षा बलों ने जंगलों और पहाड़ों के बीच नक्सलियों को मुंहतोड़ जवाब दिया है। 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के खात्मे के संकल्प के साथ जवान आगे बढ़े और इसी का नतीजा है कि चार दशकों से हिंसा झेल रहे बस्तर में अब शांति लौट आई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन इलाकों में कभी लोग जाने से डरते थे, वहां अब सड़कें बन रही हैं, रोशनी पहुंच रही है और स्कूल-अस्पताल खुल रहे हैं। ‘नियद नेल्लानार’ योजना से अंतिम छोर के गांवों तक सरकारी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजनों से स्थानीय बच्चों और युवाओं को खेल और हुनर दिखाने का नया मंच मिल रहा है। सीएम ने कहा कि शहीदों का सपना एक खुशहाल बस्तर देखना था, और वही विकसित बस्तर बनाना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
कार्यक्रम में द हिन्दू फाउंडेशन के संयोजक संदीप गुप्ता, शहीद वीर नारायण सिंह के वंशज राजेंद्र सिंह दीवान और बड़ी संख्या में शहीद परिवारों के लोग मौजूद रहे।





