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सिंधी समाज की संत माता हासी देवी के सम्मान में जारी हुआ 200 रुपए का स्मारक सिक्का, राष्ट्रपति मुर्मु ने रायपुर में किया अनावरण

माता हासी देवी की 200वीं जयंती पर मिला राष्ट्रीय सम्मान, राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय रहे मौजूद, शदाणी दरबार से बुक कर सकेंगे सिक्का

रायपुर। सिंधी समाज की आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ी पूज्य माता साहिब हासी देवी की 200वीं जयंती पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को 200 रुपए का स्मारक सिक्का जारी किया। रायपुर के लोकभवन स्थित छत्तीसगढ़ मंडपम में हुए कार्यक्रम में राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी मौजूद रहे। भारत सरकार के वित्त मंत्रालय की ओर से जारी इस सिक्के को सिंधी समाज के लिए खास सम्मान माना जा रहा है। इसके जरिए माता हासी देवी के जीवन और आध्यात्मिक योगदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की कोशिश की गई है।

कौन थीं माता हासी देवी?

माता साहिब हासी देवी पूज्य शदाणी दरबार की पांचवीं पीठाधीश थीं। शदाणी दरबार सिंधी समाज की प्रमुख आध्यात्मिक परंपराओं में गिना जाता है। इस परंपरा की जड़ें संत शद्राम साहिब की आध्यात्मिक विरासत से जुड़ी हैं। दरबार से जुड़े श्रद्धालु संत परंपरा, भक्ति और सेवा के संदेश को महत्व देते हैं। माता हासी देवी का नाम इसी धार्मिक विरासत और पीठाधीश की परंपरा से जुड़ा है। उनकी 200वीं जयंती पर स्मारक सिक्का जारी होना सिंधी समाज के लिए अपनी आध्यात्मिक धरोहर को याद करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का अवसर है।

सिक्के पर अंकित है छवि

भारत सरकार की ओर से जारी विशेष सिक्के पर माता हासी देवी की छवि अंकित है। सिक्के की दूसरी ओर अशोक स्तंभ का सिंह शीर्ष और 200 रुपए का मूल्यवर्ग दर्शाया गया है। यह सिक्का उनके जीवन, विचारों और आध्यात्मिक योगदान की याद दिलाएगा। कार्यक्रम के बाद श्रद्धालु और सिक्के जमा करने के शौकीन लोग शदाणी दरबार की अलग-अलग इकाइयों के जरिए इसे बुक कर सकेंगे।

समाज के प्रतिनिधि भी रहे मौजूद

कार्यक्रम में शदाणी दरबार रायपुर के पीठाधीश संत डॉ. युधिष्ठिर लाल ने स्वागत भाषण दिया। राज्य की प्रथम महिला रानी डेका काकोटी, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक पुरंदर मिश्रा, सुनील सोनी और मोतीलाल साहू भी मौजूद रहे। इसके अलावा मुख्य सचिव विकासशील, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, शदाणी दरबार के सदस्य और देशभर से आए जनप्रतिनिधि व सिंधी समाज के प्रतिनिधि कार्यक्रम में शामिल हुए।

माता हासी देवी के सम्मान में जारी यह सिक्का सिंधी समाज की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान देने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

सिंधी समाज में क्या है महत्व?

माता साहिब हासी देवी का जन्म 1826 में सिंध के खानपुर मेहर में हुआ था। उनका विवाह संत तनसुखराम साहिब से हुआ और वर्ष 1852 में उन्होंने शदाणी दरबार की पांचवीं पीठाधीश के रूप में जिम्मेदारी संभाली। शदाणी दरबार की धार्मिक परंपरा संत शद्राम साहिब की विरासत से जुड़ी है। सिंधी समाज में माता हासी देवी को भक्ति, सेवा और मानवता के संदेश के लिए याद किया जाता है। मान्यता है कि सिंध में अकाल के दौरान उन्होंने जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनकी 200वीं जयंती पर 200 रुपए का स्मारक सिक्का जारी होना सिंधी समाज के लिए अपनी आध्यात्मिक विरासत को सम्मान देने का अवसर है।

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