FeatureUncategorizedछत्तीसगढ़राष्ट्रीय

जनजातीय अंचलों की छात्राएं बनेंगी अंग्रेजी में पारंगत, 90 दिनों का चलेगा विशेष कोर्स

उच्च शिक्षा आयुक्त का निर्देश: जरूरत पड़ने पर रविवार व अवकाश के दिन भी लगेंगी स्पेशल कक्षाएं, मिलेगा कम्पेन्सेटरी लीव; 89 प्राचार्यों और प्राध्यापकों ने लिया प्रशिक्षण

बस्तर और सरगुजा जैसे दूरस्थ व वनांचल क्षेत्रों की कॉलेज छात्राओं की झिझक मिटाने और वैश्विक स्तर पर उन्हें प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने एक महत्वाकांक्षी खाका तैयार किया है। विभाग की ओर से बिलासपुर के शासकीय बिलासा कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय में संभाग स्तरीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों के महाविद्यालयीन छात्र-छात्राओं के अंग्रेजी संप्रेषण कौशल (कम्युनिकेशन स्किल) को मजबूत करना है।

कार्यक्रम में उच्च शिक्षा आयुक्त श्रीमती रीता यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। इस एक दिवसीय प्रशिक्षण में बिलासपुर संभाग के विभिन्न कॉलेजों से 25 प्राचार्य, 47 प्राध्यापक और 17 अन्य प्रतिभागियों सहित कुल 89 शिक्षाविदों ने भाग लिया।

छात्रहित में अवकाश के दिन भी लगेंगी कक्षाएं

कार्यशाला को संबोधित करते हुए उच्च शिक्षा आयुक्त श्रीमती रीता यादव ने स्पष्ट संदेश दिया कि शैक्षणिक गुणवत्ता और छात्रहित सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि जनजातीय वर्ग की छात्राओं के व्यक्तित्व विकास, उच्च शिक्षा और रोजगार के व्यापक अवसर तभी खुलेंगे, जब उनमें अंग्रेजी भाषा का भय खत्म होगा और आत्मविश्वास जगेगा। आयुक्त ने प्राचार्यों को निर्देशित किया कि यदि छात्राओं के भाषाई सुधार के लिए अतिरिक्त समय की दरकार हो, तो रविवार और अन्य छुट्टियों में भी विशेष कक्षाएं संचालित की जाएं। इसके बदले प्राध्यापकों व स्टाफ को नियमानुसार प्रतिपूरक अवकाश (कम्पेन्सेटरी लीव) की सुविधा दी जाएगी।

पायलट प्रोजेक्ट के रूप में 90 दिवसीय विशेष पाठ्यक्रम

तकनीकी सत्र में डॉ. एम. एस. गुप्ता ने बताया कि छात्राओं की दक्षता निखारने के लिए विशेष 90 दिवसीय पाठ्यक्रम तैयार किया गया है, जिसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पहले चरण में जनजातीय अंचलों के कॉलेजों में लागू किया जा रहा है। वहीं स्टेट कोऑर्डिनेटर डॉ. सोमाली गुप्ता ने इस कोर्स के मॉडल, नवाचारी शिक्षण पद्धति और मॉड्यूल्स की रूपरेखा प्रस्तुत की।

इससे पहले, बिलासा कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य एवं संभाग के अपर संचालक ने स्वागत भाषण में इस योजना को समावेशी शिक्षा की रीढ़ बताया। नोडल अधिकारी ने संभाग स्तर पर इस प्रशिक्षण की कार्ययोजना का रोडमैप रखा। इस पहल से दूरस्थ क्षेत्रों की छात्राओं को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं और कॉरपोरेट क्षेत्र में संवाद स्थापित करने में सीधा लाभ मिलेगा।

Related Articles

Back to top button