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छत्तीसगढ़ में कैंसर अब अधिसूचित बीमारी, निजी-सरकारी केंद्रों को रिपोर्ट अनिवार्य

रोग की पुष्टि के तीस दिनों में स्वास्थ्य विभाग को भेजनी होगी पूरी जानकारी, बिलासपुर सिम्स में विशेष परामर्श शिविर आयोजित कर शुरू हुआ मरीजों का उपचार।

छत्तीसगढ़ में कैंसर के लगातार सामने आ रहे मामलों को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य निगरानी तंत्र को और अधिक मजबूत बनाने का फैसला किया गया है। शासन ने इस गंभीर बीमारी को अधिसूचित रोग घोषित कर दिया है, जिससे अब राज्य के सभी सरकारी और निजी चिकित्सा संस्थानों में दर्ज होने वाले मरीजों का आधिकारिक रिकॉर्ड संकलित करना कानूनी रूप से अनिवार्य हो गया है। इस कदम का सीधा प्रभाव अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और पैथोलॉजी केंद्रों की कार्यप्रणाली पर पड़ेगा।

नए दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी भी मरीज में कैंसर की पुष्टि होने पर संबंधित स्वास्थ्य संस्थान को एक माह के भीतर निर्धारित प्रारूप में मरीज का पूरा ब्योरा शासन तक पहुंचाना होगा। यह अनिवार्यता केवल सरकारी तंत्र तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि निजी अस्पताल, डिस्पेंसरी, डायग्नोस्टिक सेंटर, इमेजिंग लैब, हेमेटोलॉजी केंद्र और गैर-सरकारी संगठनों द्वारा संचालित प्रशामक देखभाल इकाइयों को भी रिपोर्टिंग के दायरे में लाया गया है।

अब तक कैंसर रजिस्ट्री की व्यवस्था मुख्य रूप से स्वैच्छिक सूचनाओं पर आधारित थी, जिसके कारण वास्तविक आंकड़ों और जमीनी स्थिति का सटीक आकलन करने में तकनीकी कठिनाइयां आती थीं। अनिवार्य रिपोर्टिंग व्यवस्था लागू होने से इस बीमारी के क्षेत्रीय फैलाव, गंभीरता और मृत्यु दर के सटीक आंकड़े मिल सकेंगे। इन आंकड़ों के माध्यम से कैंसर नियंत्रण की प्रभावी नीतियां तैयार करने, आवश्यक दवाओं व चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा भविष्य के शोध और प्रशिक्षण को नई दिशा देने में काफी सहूलियत मिलेगी। शीर्ष अदालत द्वारा इस रोग की अनिवार्य रिपोर्टिंग को लेकर दिए गए निर्देशों के परिप्रेक्ष्य में यह कदम अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, नियमित रिपोर्टिंग बनाए रखना और मरीजों के व्यक्तिगत विवरण की गोपनीयता सुरक्षित रखना प्रमुख चुनौती रहेगी।

दूसरी ओर, बिलासपुर स्थित आयुर्विज्ञान संस्थान में सेवा संकल्प अभियान के तहत कैंसर रोकथाम और समय पर पहचान के लिए एक विशेष परामर्श शिविर आयोजित किया गया। प्रत्येक शुक्रवार को आयोजित होने वाले इस नियमित शिविर में कुल 35 मरीजों की चिकित्सकीय जांच की गई। परीक्षण के दौरान विशेषज्ञों द्वारा आवश्यक जांच, आहार और दिनचर्या से जुड़े परामर्श दिए गए, जबकि 13 मरीजों को आगे के उपचार के लिए इनडोर वार्ड में भर्ती कर प्रक्रिया शुरू की गई।

चिकित्सकों के अनुसार तंबाकू और धूम्रपान से दूरी, संतुलित खानपान तथा शरीर में किसी भी असामान्य गांठ, अकारण वजन घटने या न भरने वाले घाव जैसे लक्षणों पर तुरंत परामर्श लेना ही इस घातक बीमारी से बचाव का सर्वोत्तम उपाय है। नियमित शिविरों और आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के जरिए प्रारंभिक स्तर पर ही पहचान कर मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने पर लगातार जोर दिया जा रहा है।

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