
रायपुर। छत्तीसगढ़ ने स्कूल शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के इस्तेमाल की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राजधानी रायपुर के पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में गुरुवार को राज्यस्तरीय AI कॉन्क्लेव आयोजित किया गया। स्कूल शिक्षा विभाग का दावा है कि विद्यालयीन शिक्षा के स्तर पर AI का व्यवस्थित इस्तेमाल शुरू करने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बन गया है।
पढ़ाई सुधारने पर फोकस
कॉन्क्लेव का मुख्य उद्देश्य स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने के लिए AI के संभावित इस्तेमाल को समझना और उसके आधार पर आगे की रणनीति तैयार करना रहा। कार्यक्रम में शिक्षा, तकनीक और डिजिटल लर्निंग से जुड़े विशेषज्ञों ने बताया कि AI का इस्तेमाल सिर्फ तकनीकी सुविधा तक सीमित न रहकर शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए उपयोगी बनाया जा सकता है।
ड्रॉपआउट बच्चों पर नजर
कार्यक्रम में शाला छोड़ चुके बच्चों को दोबारा स्कूल से जोड़ने के लिए तैयार किया गया ‘लाईका चिन्हारी’ ऐप भी लॉन्च किया गया। इसके जरिए स्कूल से बाहर हो चुके बच्चों की पहचान और उन्हें दोबारा शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने की प्रक्रिया को आसान बनाने की कोशिश की जाएगी।
शिक्षक की जगह नहीं लेगा AI
कॉन्क्लेव में यह बात भी साफ की गई कि AI को शिक्षक के विकल्प के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसका इस्तेमाल शिक्षकों के काम को आसान बनाने वाले सहायक टूल के रूप में किया जाएगा। स्थानीय जरूरतों और स्कूलों में उपलब्ध संसाधनों के हिसाब से AI के इस्तेमाल पर जोर दिया गया।
इससे शिक्षकों को विद्यार्थियों की जरूरत समझने, पढ़ाई को आसान बनाने और उपलब्ध डिजिटल संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
स्मार्ट क्लास और ICT लैब
स्कूलों में पहले से मौजूद स्मार्ट क्लास और ICT लैब को AI की मदद से ज्यादा प्रभावी बनाने पर भी चर्चा हुई। इसका मकसद तकनीक को केवल उपकरण उपलब्ध कराने तक सीमित रखने के बजाय उसे सीधे कक्षा की पढ़ाई से जोड़ना है।
बड़े तकनीकी संस्थान भी जुड़े
कॉन्क्लेव में देश और दुनिया की कई प्रमुख तकनीकी और शैक्षणिक संस्थाओं ने हिस्सा लिया। गूगल, वाधवानी एआई, अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट, एडोब, खान एकेडमी, फिजिक्स वाला, आईआईटी भिलाई, आईआईएम रायपुर, एनआईटी रायपुर और चिप्स से जुड़े विशेषज्ञों ने प्रस्तुतियां दीं।
इन प्रस्तुतियों में शिक्षा में AI के इस्तेमाल, डिजिटल लर्निंग, विद्यार्थियों के कौशल विकास और तकनीक आधारित शिक्षण जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
अब बनेगा AI रोडमैप
कॉन्क्लेव के बाद असली चुनौती इन सुझावों को जमीन पर उतारने की होगी। कार्यक्रम में सामने आए तकनीकी समाधानों और नवाचारों का अध्ययन कर स्कूल शिक्षा विभाग के लिए व्यापक AI रोडमैप तैयार किया जाएगा।
यह रोडमैप तय करेगा कि आने वाले समय में स्कूलों में AI का इस्तेमाल किन क्षेत्रों में किया जाए। इसमें शिक्षकों के लिए सहायक संसाधन विकसित करने से लेकर डिजिटल कक्षाओं और विद्यार्थियों के कौशल विकास तक के पहलुओं को शामिल किया जाएगा।
तकनीक से बदलेगी पढ़ाई?
AI को स्कूलों तक पहुंचाने की तैयारी शुरू हो गई है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि तकनीक का इस्तेमाल कितनी आसानी से कक्षा और विद्यार्थियों की वास्तविक जरूरतों से जोड़ा जाता है। कॉन्क्लेव के जरिए सरकार ने रोडमैप बनाने की शुरुआत कर दी है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि तैयार होने वाला रोडमैप स्कूलों में कब और किस तरह लागू होता है।





