
रायपुर। दूरदराज और ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए टेली मेडिसिन को तेजी से विस्तार दिया जा रहा है। आयुष मंत्रालय के इस डिजिटल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत मरीज घर के नजदीक से ही विशेषज्ञ डॉक्टरों से सलाह ले सकते हैं। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, फोन कॉल और मोबाइल ऐप के जरिए इलाज संबंधी परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
256 संस्थानों में सेवा शुरू
छत्तीसगढ़ में आयुष विभाग अप्रैल 2024 से टेली मेडिसिन कार्यक्रम चला रहा है। फिलहाल प्रदेश की 256 आयुष संस्थाओं में यह सुविधा संचालित हो रही है। योजना को चरणबद्ध तरीके से प्रदेश की सभी आयुष संस्थाओं तक पहुंचाने की तैयारी है। इसका मकसद उन इलाकों तक विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है, जहां मरीजों को डॉक्टरों की सलाह के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
8 हजार से ज्यादा मरीज जुड़े
प्रदेश में अब तक 8056 हितग्राहियों को टेली मेडिसिन के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ दिया जा चुका है। आंकड़ा यह बताता है कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में डिजिटल माध्यम से चिकित्सा परामर्श की मांग बढ़ रही है। आने वाले समय में संस्थानों की संख्या बढ़ने के साथ इस सुविधा से जुड़ने वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ सकती है।
दो हब, 54 हब-सह-स्पोक
टेली मेडिसिन व्यवस्था को हब और स्पोक मॉडल के जरिए आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके लिए प्रदेश में 2 हब, 54 हब-सह-स्पोक और 200 हब सेंटर का चयन किया गया है। इस नेटवर्क के जरिए अलग-अलग इलाकों के मरीजों को डिजिटल माध्यम से विशेषज्ञ चिकित्सकीय सलाह उपलब्ध कराने की व्यवस्था तैयार की जा रही है।
गांवों के मरीजों को राहत
टेली मेडिसिन का सबसे बड़ा फायदा उन मरीजों को मिल सकता है, जिन्हें विशेषज्ञ डॉक्टरों तक पहुंचने के लिए जिला मुख्यालय या बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है। डिजिटल माध्यम से सलाह मिलने पर शुरुआती परामर्श के लिए यात्रा करने की जरूरत कम होगी। इससे समय और आने-जाने का खर्च बच सकता है।
डॉक्टर तक डिजिटल पहुंच
इस व्यवस्था में मरीज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, फोन या मोबाइल ऐप के जरिए चिकित्सकीय परामर्श ले सकते हैं। डिजिटल तकनीक के जरिए डॉक्टर और मरीज के बीच दूरी कम करने की कोशिश की जा रही है। खासकर ऐसे क्षेत्रों में, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियमित उपलब्धता चुनौती बनी रहती है, टेली मेडिसिन वैकल्पिक माध्यम के तौर पर उपयोगी हो सकती है।
सिर्फ सुविधा नहीं, नई चुनौती भी
डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार आसान नहीं है। दूरदराज क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी, डिजिटल जानकारी और उपकरणों की उपलब्धता जैसी चुनौतियां बनी रहती हैं। ऐसे में टेली मेडिसिन का नेटवर्क बढ़ाने के साथ यह भी जरूरी होगा कि मरीजों को डिजिटल माध्यम का इस्तेमाल करने में मदद मिले और जरूरत पड़ने पर उन्हें प्रत्यक्ष उपचार की सुविधा भी उपलब्ध हो।
सभी आयुष संस्थानों तक विस्तार
छत्तीसगढ़ में अभी 256 संस्थानों से शुरू हुई यह सुविधा आगे सभी आयुष संस्थानों तक चरणबद्ध तरीके से पहुंचाने की योजना है। इससे डिजिटल माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच का दायरा बढ़ेगा। हालांकि इसकी वास्तविक उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि दूरस्थ क्षेत्रों में कनेक्टिविटी, विशेषज्ञ परामर्श और मरीजों के लिए जरूरी स्वास्थ्य सुविधाओं का नेटवर्क कितना मजबूत किया जाता है।





