
रायपुर के गुढ़ियारी थाने में डीजे कार्रवाई को लेकर बड़ा विवाद हो गया। आरोप है कि भाजयुमो जिला उपाध्यक्ष शुभांकर द्विवेदी पुलिस की कार्रवाई रुकवाने थाने पहुंचे थे। पुलिस ने तेज आवाज में डीजे बजाने के मामले में एक व्यक्ति को पकड़ा था। इसी को छुड़ाने की मांग को लेकर थाने में बहस शुरू हुई और मामला हंगामे तक पहुंच गया।
बताया जा रहा है कि द्विवेदी पुलिस से डीजे संचालक को छोड़ने की मांग कर रहे थे। पुलिस ने नियम के मुताबिक कार्रवाई करने की बात कही तो विवाद बढ़ता गया। आरोप है कि नेता और उनके साथ पहुंचे लोगों ने पुलिस पर कार्रवाई रोकने का दबाव बनाया।
गणेशोत्सव के दौरान शहर में डीजे और तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम को लेकर पुलिस पहले से सख्ती कर रही है। तय सीमा से ज्यादा आवाज में डीजे बजाने वालों पर कार्रवाई की जा रही है। इसी अभियान के तहत गुढ़ियारी पुलिस ने भी कार्रवाई की थी।
विवाद इतना बढ़ गया कि आरोप है कि थाने के अंदर बैठक कक्ष में लगा टीवी तोड़ दिया गया। इससे पुलिसकर्मियों के बीच भी हड़कंप मच गया। मामला अब सिर्फ डीजे की कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि थाने में सरकारी सामान तोड़े जाने तक पहुंच गया है।
इस घटना ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर किसी राजनीतिक संगठन से जुड़े व्यक्ति पर थाने के भीतर तोड़फोड़ का आरोप है तो पुलिस उस पर कितनी सख्ती दिखाती है, यह देखने वाली बात होगी। खासकर तब, जब पुलिस शहर में आम लोगों और डीजे संचालकों पर लगातार कार्रवाई कर रही है।
मामले में भाजयुमो नेता के खिलाफ एफआईआर की तैयारी की बात सामने आई है। हालांकि खबर लिखे जाने तक पुलिस ने एफआईआर की धाराओं या दर्ज मामले की आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की थी। इसलिए फिलहाल आरोपों और पुलिस की अगली कार्रवाई पर नजर है।
शुभांकर द्विवेदी का नाम इससे पहले भी विवाद में आ चुका है। 2023 में बेमेतरा हिंसा से जुड़े एक मामले को लेकर रायपुर के सिविल लाइंस थाने में उनके खिलाफ केस दर्ज होने की खबर सामने आई थी।
गुढ़ियारी की ताजा घटना ने अब बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। क्या राजनीतिक पहचान के दम पर थाने में पुलिस पर दबाव बनाया जा सकता है? अगर कानून लागू कराने वाली जगह पर ही दबाव और तोड़फोड़ के आरोप लगें, तो पुलिस की निष्पक्ष कार्रवाई पर सवाल उठना स्वाभाविक है।





