
रायपुर। छत्तीसगढ़ में जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) की राशि को विकास कार्यों में उपयोग करने की सरकार की नीति अब जमीनी स्तर पर असर दिखाने लगी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशानुरूप और वित्त मंत्री व रायगढ़ विधायक ओपी चौधरी के प्रयासों से रायगढ़ जिले के लिए 13 महत्वपूर्ण विकास कार्यों को प्रशासनिक स्वीकृति मिल गई है। इन कार्यों पर कुल 10 करोड़ 86 लाख 53 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे। स्वीकृत परियोजनाओं में ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ युवाओं के लिए आधुनिक कौशल विकास केंद्रों का निर्माण भी शामिल है।
13 विकास कार्यों को मिली हरी झंडी
जारी प्रशासनिक स्वीकृति के अनुसार डीएमएफ मद से जिले में कुल 13 विकास कार्य कराए जाएंगे। इनमें लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के माध्यम से 12 पेयजल परियोजनाओं के लिए 1 करोड़ 30 लाख 35 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। वहीं छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के जरिए मॉडल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग सेंटर भवन निर्माण और अन्य अधोसंरचना विकास कार्यों के लिए 9 करोड़ 56 लाख 18 हजार रुपये मंजूर किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होगा।
12 गांवों में सुधरेगी पेयजल व्यवस्था
डीएमएफ मद से स्वीकृत राशि के तहत रायगढ़, धरमजयगढ़ और तमनार विकासखंड के 12 गांवों में पेयजल संबंधी कार्य किए जाएंगे। इन योजनाओं में नई जलापूर्ति व्यवस्था विकसित करने के साथ आवश्यक अधोसंरचना तैयार की जाएगी। परियोजनाओं के पूरा होने के बाद हजारों ग्रामीणों को स्वच्छ और सुगम पेयजल उपलब्ध होने की उम्मीद है। लंबे समय से पेयजल संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे कई गांवों को इन कार्यों से सीधा लाभ मिलेगा।
स्थानीय जरूरतों को मिली प्राथमिकता
जिला प्रशासन का कहना है कि डीएमएफ निधि का उपयोग स्थानीय जरूरतों के आधार पर किया जा रहा है। जिन क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की कमी है, वहां प्राथमिकता के साथ योजनाएं स्वीकृत की जा रही हैं। प्रशासन का मानना है कि खनिज संपदा से मिलने वाली राशि का लाभ सीधे प्रभावित क्षेत्रों और वहां रहने वाले लोगों तक पहुंचना चाहिए। इसी सोच के तहत पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
युवाओं के लिए बनेंगे आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र
धरमजयगढ़, लैलूंगा, तमनार और घरघोड़ा विकासखंडों में मॉडल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग सेंटर का निर्माण कराया जाएगा। इन केंद्रों के निर्माण पर 9 करोड़ 56 लाख 18 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे। यहां युवाओं को आधुनिक तकनीक और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को रोजगारोन्मुखी कौशल उपलब्ध कराना है ताकि वे स्थानीय स्तर के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी रोजगार के बेहतर अवसर हासिल कर सकें।
कौशल विकास को मिलेगी नई दिशा
प्रशिक्षण केंद्रों के शुरू होने के बाद युवाओं को विभिन्न ट्रेडों में व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा। इससे स्वरोजगार और निजी क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं बढ़ेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएं समय पर शुरू होती हैं तो इसका सीधा लाभ औद्योगिक क्षेत्र वाले रायगढ़ जिले के युवाओं को मिलेगा। इससे उद्योगों की जरूरत के अनुरूप प्रशिक्षित मानव संसाधन भी तैयार हो सकेगा।
समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निर्माण के निर्देश
कलेक्टर ने सभी स्वीकृत कार्यों को निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण और तय समयसीमा में पूरा करने के निर्देश संबंधित विभागों को दिए हैं। निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी भी की जाएगी ताकि किसी प्रकार की लापरवाही या अनावश्यक देरी न हो। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि स्वीकृत राशि का उपयोग पारदर्शिता के साथ किया जाए और योजनाओं का लाभ समय पर लोगों तक पहुंचे।
डीएमएफ से विकास मॉडल को मिलेगी मजबूती
राज्य सरकार का मानना है कि डीएमएफ मद का प्रभावी उपयोग खनिज प्रभावित क्षेत्रों के समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। रायगढ़ में स्वीकृत ये 13 परियोजनाएं न केवल ग्रामीण अधोसंरचना को मजबूत करेंगी, बल्कि पेयजल और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में भी स्थायी सुधार लाएंगी। सरकार को उम्मीद है कि इन योजनाओं के पूरा होने के बाद जिले में विकास की रफ्तार और तेज होगी तथा स्थानीय लोगों को बेहतर सुविधाओं का लाभ मिलेगा।




