संघ के शताब्दी वर्ष में अब हिंदू समाज हो रहा संगठित : आरएसएस सह सरकार्यवाह रामदत्त चक्रधर
- आरएसएस के शारीरिक प्रकट उत्सव में दिखा आरएसएस की तपोसाधना का दर्शन और प्रदर्शन - बतौर मुख्य वक्ता उपस्थित हुए संघ के मा. सह सरकार्यवाह रामदत्त चक्रधर - संघ की दैनंदिनी शाखा के शारीरिक प्रयोग का हुआ शानदार प्रदर्शन, उत्साहित हुए दर्शक

रायपुर । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष में अब हिंदू समाज संगठित हो रहा है। उक्त वक्तव्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के माननीय सह सरकार्यवाह रामदत्त चक्रधर ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ रायपुर महानगर के तत्वावधान में साइंस कॉलेज ग्राउंड में आयोजित शारीरिक प्रकट उत्सव कार्यक्रम में स्वयंसेवकों और समाज के गणमान्य लोगों को संबोधित करते हुए कहा। उन्होंने कहा कि संघ के शताब्दी वर्ष में हम सभी की साधना से यह तो तय हो गया कि हिंदू समाज संगठित हो रहा है जिसकी कल्पना परम पूज्य डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार जी ने किया था। अब संघ के 100 वे वर्ष में हमारा दायित्व बढ़ गया है। हम सब लोगों को संघ बनना होगा।
उन्होंने संघ के पंच परिवर्तन विषय को बताते हुए कहा कि हम वसुधैव कुटुंबकम् की बात तो बोलते हैं परंतु अपने व्यवहार में परिवार को संगठित करना और संभालना हमें आना चाहिए। सुसंगठित परिवार बनाना हमारी प्राथमिकता हो।
सामाजिक समरसता से समाज परिवर्तन पर उन्होंने कहा कि समरसता का भाव अपने घर से शुरू करना हमारा कर्तव्य हो।

देश में पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता को समझाते हुए उन्होंने कहा कि ऑक्सीजन के अभाव को हमने कोरोना काल में प्राण गंवाकर समझा है। ऐसे में पेड़ लगाकर पर्यावरणीय संरक्षण का काम हमें करना होगा। प्लास्टिक के उपयोग को कम करने का काम स्वयं से शुरू करना होगा। ऐसा कार्य करने के लिए हमें अपने पड़ोसियों और मोहल्लों में बेहतर वातावरण बनाना होगा।
उन्होंने स्व के भाव के जागरण के लिए अंग्रेजी कैलेंडर की बजाय हिंदू नव वर्ष को मनाने के साथ हस्ताक्षर, फलक लेखन, निमंत्रण पत्र को हिंदी में लिखने का आग्रह किया।
नागरिक कर्तव्य पर दायित्व बोध कराते हुए उन्होंने कहा कि देश के विधि विधान के अनुसार हमारे आचार व्यवहार हों, इसी से अनुशासित और सभ्य समाज का निर्माण होगा।
इस शताब्दी वर्ष में संघ पद्धति से गट बनाकर गांव/शहर के प्रत्येक बस्ती, घर में जाकर उनका एकत्रीकरण करके हिंदू सम्मेलन करना है। युवाओं के बीच रहकर एक सशक्त और संगठित हिंदू समाज की रचना करना होगा।
आगामी विजयादशमी में संघ के 100 वर्ष बीत जाने पर भी हमें पूरे उत्साह से शाखाओं के माध्यम से इस पंच परिवर्तन को लेकर समाज परिवर्तन और विस्तार दृढ़ीकरण का कार्य करना होगा।
उन्होंने कहा कि भारत की तरफ पूरे विश्व का ध्यान है। हम 5 वीं बड़ी अर्थव्यवस्था से तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था के देश में पहुंच रहे हैं । परंतु यहां यह ध्यान देने की आवश्यकता है कि आर्थिक विकास के साथ साथ जीवन मूल्यों में भी बढ़त हो।
उन्होंने उपस्थित स्वयंसेवकों से अपील करते हुए कहा कि हमारा मूल स्वभाव संगठन का होना चाहिए। हमें समाज के सज्जन शक्ति को लेकर चलते हुए उनकी योग्यता और रुचि के अनुसार परिवर्तन के कार्य में नियोजित करना होगा। इस शताब्दी वर्ष में संघ के लिए समय देनेवाले समयदानी लोगों से संपर्क करके व्यापक परिवर्तन की योजना बनानी चाहिए।
इस अवसर पर उन्होंने समाज के लोगों से भी अपील करते हुए कहा कि जागरण के इस पुनीत कार्य में आप सहभागी हो और हमारे कार्यकर्ता को अपना आशीर्वाद दें।
अपने उद्बोधन के अंत में उन्होंने स्वयंसेवकों में वीरता का भाव भरते हुए तथा विद्रोही शक्तियों को चेताते हुए यह कवितांश कहा –
“एक हाथ में सृजन दूसरे में हम प्रलय लिए चलते हैं।
सभी कीर्ति ज्वाला में जलते, हम अंधियारे में जलते हैं। आँखों में वैभव के सपने पग में तूफानों की गति हो।
राष्ट्र भक्ति का ज्वार न रुकता, आए जिस जिस की हिम्मत हो।”
इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अलेख समाज के संत उदयनाथ जी ने कहा परमपूज्य डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार ने जिस समाज की कल्पना की, उसका यहां रूप दिख रहा है। उन्होंने कहा कि यष्टी और मुष्टि से विद्रोहियों को ठीक करने का जैसा कार्य भगवान श्री कृष्ण ने किया वैसा ही आप सभी स्वयंसेवक कर रहे हैं।
इस कार्यक्रम का आयोजन समाज के लोगों को संघ की शाखा में होनेवाले दैनिक कार्यक्रम और उससे होनेवाले व्यक्तित्व निर्माण के प्रकटीकरण के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष किया जाता है।

इस प्रकटीकरण कार्यक्रम में दंड के प्रयोग, नियुद्ध, पद विन्यास, दंड युद्ध, समता, गोपुर, योग, दंड व्यायाम, खेल और सामूहिक गीत के सभी प्रयोग पूरी प्रामाणिकता के साथ किए गए।
दंड के प्रयोग करके जहां स्वयंसेवकों ने दंड से अपनी सुरक्षा की साधना का तस्वीर दिखाया वही दंड युद्ध करके अपने अजेय होने की धाक जमाने का साहसिक प्रदर्शन किया। नियुद्ध के बेहतर प्रदर्शन से स्वयंसेवकों ने स्वयं की सुरक्षा और युद्ध में जीत तय करने के गुण को बताया।
वहीं भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के जयघोष के साथ
सामूहिक शक्ति के प्रकटीकरण के प्रयोग – गोपुर का प्रदर्शन बहुत प्रशंसनीय लगा। खेल से संस्कार भरने के दृष्टिगत खेल का प्रदर्शन बड़ा मनमोहक लगा ।
वहीं समाज में आपसी सहयोग की भावना को जागृत करने के दृष्टि से सामूहिक समता के चार प्रयोग ने सबको साथ लेकर चलने के भाव को दिखाया।
इस कार्यक्रम में सबसे मनमोहक क्षण तब रहा जब कबीर के दोहे के साथ योग के प्रयोग किए गए।
इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मध्य क्षेत्र के माननीय क्षेत्र संघ चालक डॉ पूर्णेन्दु सक्सेना, रायपुर महानगर के माननीय महानगर संघचालक महेश बिड़ला सहित हजारों की संख्या में स्वयंसेवक और गणमान्य लोग उपस्थित हुए।



