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पक्षी को घर का सदस्य बना नमन ने पर्यावरण संरक्षण में पेश किया मिशाल

राजनांदगाव। पर्यावरणीय संतुलन बनाने में पक्षियों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण होता है । पर्यावरण संतुलन और पक्षियों के बीच सीधा सबन्ध होता है। स्थान विशेष में पाई जाने वाली चिड़ियों की किस्में व उनकी तादात जितनी अधिक होंती है, वहाँ का पर्यावरण उतना ही स्वस्थ माना जाता है। इसलिए पक्षियों के संरक्षण के लिए हमारा व्यवहार संवेदनशील होना चाहिए। पक्षियों के संरक्षण के प्रति ऐसी ही संवेदनशीलता राजनांदगांव के स्टेशन पारा, मुदलियार कॉलोनी के 7 वर्षीय बालक नमन वर्मा ने अपने व्यवहार से कर दिखाया है।


हुआ यूँ कि गत चार दिन पूर्व तपती दोपहरिया में नमन के घर में एक रस्सी पर एक पक्षी आती है और वह देखते ही देखते घोसला बना लेती है। वह घोसले में अपने बच्चों को लाती है। इसका शक्ल किंग फिशर की तरह दीखता है। यह पूरी घटना नमन ने क्रम से देखा। अब घोंसले की बनावट ऐसी हो गई है कि वह जमीन से 4 फीट की ऊँचाई तक आ गई है। इसलिए घर के सभी सदस्य रास्ता बदलकर जाते हैं ताकि घोसले को नुकसान नहीं हो।

अब नमन, बहन ख़ुशी वर्मा, उसके पिता रेवेंद्र वर्मा और माता मालती वर्मा उस पक्षी के संरक्षण में भोजन-पानी की व्यवस्था करते हैं। वह घर का सदस्य बन गई है। नमन की मां मालती वर्मा बताती है कि जब से यह पक्षी घर में आई है तब से उसकी जिंदगी पक्षियों के संरक्षण के लिए केन्द्रित हुई है। इस पक्षी के संरक्षण को लेकर अब नमन ने अपनी दिनचर्या ही बदल दी है, जो अन्य बच्चों के लिए प्रेरणा का श्रोत बन गया है।

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