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श्री देव आनंद जैन शिक्षण संघ के खिलाफ जांच का आदेश रजिस्ट्रार ने नियुक्त किया जांच अधिकारी

कार्यकारिणी , सदस्यता और वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतों पर शासन सख्त, 60 दिनों में सौंपनी होगी रिपोर्ट

शहर की प्रतिष्ठित संस्था ‘श्री देव आनंद जैन शिक्षण संघ’ के कामकाज और वित्तीय प्रबंधन को लेकर लंबे समय से चल रही शिकायतों के बाद अब शासन ने कड़ा रुख अपनाया है। रजिस्ट्रार फर्म्स एवं संस्थाएं, छत्तीसगढ़ ने संस्था के विरुद्ध औपचारिक जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। इस जांच के लिए सहायक पंजीयक (बिलासपुर संभाग) को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है, जिन्हें अधिनियम के तहत व्यापक शक्तियां प्रदान की गई हैं।
लगातार शिकायतों के बाद कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, रजिस्ट्रार कार्यालय को 14 मार्च 2025 से लेकर 08 जनवरी 2026 के मध्य संस्था के खिलाफ कई गंभीर शिकायतें प्राप्त हुई थीं। ये शिकायतें मुख्य रूप से संस्था के गठन, सदस्यता प्रक्रिया, कार्यकारणी और वित्तीय स्थिति में अनियमितताओं को लेकर थीं। विभाग द्वारा इस संबंध में संस्था से जवाब तलब किया गया था, लेकिन समय-सीमा के भीतर संस्था द्वारा प्रस्तुत जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए। इसके चलते शिकायतकर्ताओं द्वारा लगातार निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही थी।
कानूनी प्रावधान और जांच अधिकारी की नियुक्ति
मामले की गंभीरता को देखते हुए, रजिस्ट्रार ने छत्तीसगढ़ सोसायटी रजिस्ट्रिकरण अधिनियम, 1973 (संशोधित 1998) की धारा 32(1) के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए जांच का आदेश दिया है।
जांच का जिम्मा श्री ज्ञान प्रकाश साहू (सहायक पंजीयक, फर्म्स एवं संस्थाएं, बिलासपुर संभाग) को सौंपा गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जांच अधिकारी को अधिनियम की धारा 32(3) के तहत वे सभी विधिक शक्तियां प्राप्त होंगी, जो निष्पक्ष जांच के लिए आवश्यक हैं। इसमें गवाहों को बुलाने, 0दस्तावेजों को जब्त करने या तलब करने का अधिकार शामिल हो सकता है।
60 दिन की समय-सीमा निर्धारित
आदेश के मुताबिक, जांच अधिकारी को संस्था के कार्यकरण, वैधानिक गठन और वित्तीय लेन-देन की सूक्ष्मता से जांच करनी होगी। उन्हें अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट 60 दिनों के भीतर रजिस्ट्रार कार्यालय में प्रस्तुत करनी होगी।
सहयोग न करने पर हो सकती है कार्रवाई
रजिस्ट्रार ने श्री देव आनंद जैन शिक्षण संघ के अध्यक्ष और सचिव को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे जांच अधिकारी द्वारा मांगे गए सभी आवश्यक अभिलेख और दस्तावेज तत्काल उपलब्ध कराएं। जांच में असहयोग या दस्तावेज छिपाने की स्थिति में संस्था के पदाधिकारियों पर कानूनी शिकंजा और कस सकता है।
पारदर्शिता पर जोर
प्रशासन का यह कदम स्पष्ट करता है कि सार्वजनिक शिक्षण संस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए शासन अब किसी भी प्रकार की कोताही बरतने के मूड में नहीं है। इस जांच से संस्था की वास्तविक आंतरिक स्थिति और वित्तीय प्रबंधन की सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।

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