
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कानून-व्यवस्था को अधिक सशक्त, त्वरित और प्रभावी बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाया है। गृह (पुलिस) विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार रायपुर जिले में पुलिस आयुक्त प्रणाली (Police Commissionerate System) को लागू कर दिया गया है। यह नई व्यवस्था 23 जनवरी 2026 से प्रभावशील होगी। इसके साथ ही राजधानी की पुलिसिंग व्यवस्था में बड़ा संरचनात्मक और प्रशासनिक बदलाव देखने को मिलेगा।
राज्य शासन ने यह निर्णय छत्तीसगढ़ पुलिस अधिनियम 2007 की धारा 5 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लिया है। अधिसूचना के तहत रायपुर जिले को पुलिस आयुक्त क्षेत्र घोषित किया गया है और शहरी एवं ग्रामीण थाना क्षेत्रों का स्पष्ट रूप से पुनर्गठन किया गया है। सरकार का मानना है कि तेजी से बढ़ती आबादी, शहरीकरण, ट्रैफिक दबाव और अपराध की चुनौतियों को देखते हुए यह व्यवस्था समय की मांग थी।
रायपुर नगर क्षेत्र में 21 थाना शामिल
अधिसूचना के अनुसार रायपुर नगर पुलिस जिला अंतर्गत कुल 21 थाना क्षेत्रों को पुलिस आयुक्त प्रणाली में शामिल किया गया है। इनमें सिविल लाइन, देवेंद्र नगर, तेलीबांधा, कोतवाली, गंज, मोतीबाग, गोल बाजार, पुरानी बस्ती, डीडी नगर, आमासिवनी, आजाद चौक, सरस्वती नगर, कबीर नगर, राजेंद्र नगर, टिकरापारा, उरला (नगर पालिक निगम बीरगांव के अंतर्गत आने वाला क्षेत्र), खमतराई, गुढ़ियारी, पंडरी और अन्य अधिसूचित शहरी क्षेत्र शामिल हैं। यह सभी थाना क्षेत्र अब सीधे पुलिस आयुक्त के अधिकार क्षेत्र में रहेंगे।

ग्रामीण क्षेत्र के 12 थाना भी आयुक्त प्रणाली में
वहीं रायपुर ग्रामीण पुलिस जिला अंतर्गत 12 थाना क्षेत्रों को भी आयुक्त प्रणाली में शामिल किया गया है। इनमें विधानसभा, धरसींवा, खरोरा, तिल्दा नेवरा, माना, मंदिर हसौद, आरंग, नया रायपुर, राखी, अभनपुर, गोबरा नवापारा और उरला (नगर पालिक निगम बीरगांव के बाहर आने वाला क्षेत्र) शामिल हैं। इससे राजधानी से लगे ग्रामीण और औद्योगिक क्षेत्रों में भी कानून-व्यवस्था की निगरानी अधिक सख्त और संगठित रूप में की जा सकेगी।
पुलिस अधिकारियों को मिलेंगे विशेष अधिकार
नई व्यवस्था के तहत पुलिस महानिरीक्षक, रायपुर रेंज को पुलिस आयुक्त के अधिकार सौंपे गए हैं, जबकि पुलिस अधीक्षक रायपुर अतिरिक्त पुलिस आयुक्त की भूमिका निभाएंगे। पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू होने से पुलिस को कई मामलों में मजिस्ट्रेटीय शक्तियां प्राप्त होंगी। इससे धारा 144 लागू करने, जुलूस-धरना नियंत्रण, सार्वजनिक शांति बनाए रखने और संवेदनशील परिस्थितियों में त्वरित निर्णय लेने में प्रशासनिक देरी कम होगी।
अपराध नियंत्रण और त्वरित न्याय की दिशा में कदम
सरकार का मानना है कि पुलिस आयुक्त प्रणाली से अपराध नियंत्रण की क्षमता बढ़ेगी, क्योंकि पुलिस को निर्णय लेने के लिए बार-बार जिला प्रशासन पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। राजधानी जैसे बड़े और संवेदनशील शहरी क्षेत्र में यह व्यवस्था अपराधियों पर लगाम कसने, ट्रैफिक प्रबंधन सुधारने और कानून-व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त रखने में मददगार साबित होगी।
गृह विभाग ने दिए सख्त निर्देश
गृह (पुलिस) विभाग ने पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक, कलेक्टर रायपुर सहित सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि अधिसूचना के अनुरूप आवश्यक प्रशासनिक, तकनीकी और संरचनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। थाना स्तर से लेकर जिला और रेंज स्तर तक अधिकारियों को नई व्यवस्था के अनुरूप जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी।
राजधानी की पुलिसिंग में नया अध्याय
रायपुर में पुलिस आयुक्त प्रणाली का लागू होना छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। इससे पहले देश के कई बड़े शहरों में यह व्यवस्था लागू हो चुकी है और वहां इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। रायपुर में भी इससे कानून-व्यवस्था में सुधार, पुलिस की जवाबदेही बढ़ने और आम नागरिकों को त्वरित राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
सरकार का दावा है कि यह व्यवस्था न केवल राजधानी की सुरक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि छत्तीसगढ़ को आधुनिक और प्रभावी पुलिसिंग की दिशा में एक कदम आगे ले जाएगी।



