
LOKTANTRA24 EXPOSE ‘सरकारी अस्पताल में इलाज नही मिलता’, ऐसा बता निजी अस्पतालों में मरीजों को ले जाने और वहां वसूली से संबंधित फिल्में आपने बहुत देखी होंगी…. लेकिन अब आपको सतर्क होने की जरुरत है… क्योंकि रायपुर में भी कुछ सरकारी एंबुलेंस ड्राइवर ऐसा कर रहे हैं। वे मोटी कमीशन के चक्कर में मरीजों की बहला फुसला रहे हैं और निजी अस्पतालों से कमीशन लेकर मरीजों को वहां भर्ती करवा रहे हैं। लोकतंत्र24 ने ऐसे ही कुछ मामलों की पड़ताल की है।
जानिए कैसे होता है खेल
आप एंबुलेंस से संबंधित निःशुल्क सहायता के लिए जब 112 पर फोन करते हैं तो कॉल 108 को ट्रांसफर हो जाती है। बस क्या, फोन आते ही कुछ ड्राइवर और ईएमटी के शरीर में करंट दौड़ जाता है। वे मरीज और उसके परिजनेां की काउंसिलिंग शुरु कर देते हैं। उनका प्रयास होता है कि किसी तरह मरीज को उनके चहेते निजी अस्प्ताल शिफ्ट किया जाए। ताकि उन्हें निजी अस्पताल की तरफ से मोटा कमीशन मिल सके। मरीज या उसके परिजनों को कंवेंस करने के बाद किसी सुरक्षित स्थान पर मरीजों को निजी अस्पताल के एंबुलेंस में शिफ्ट करवा दिया जाता है। जिससे मरीज निजी अस्पातल में भर्ती हो सके। इस काम के लिए कुछ ड्राइवर और ईएमटी ने तो एंबुलेंस भी खरीद रखा है, जो मेकाहारा सहित प्रदेश के प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में ही खड़ी रखते है। इसका उदाहरण मेकाहारा, एम्स सहित रायपुर के स्वास्थ्य केंद्रों में देखने मिल जाएगा। बड़ी बात यह है कि संस्थान प्रमुख इस बात से खुद को बेखबर बताते हैं।
लोकतंत्र24 को मिले वीडियो में इस कारगुजारी का खुलासा हो रहा है। वीडियो रायपुर के मंदिर हसौद स्वास्थ्य केंद्र का है। जिसमें ड्राइवर मरीज को 108 एंबुलेंस से निजी एंबुलेंस मे शिफ्ट करता दिख रहा है। परिजनों से बात करने पर उन्होंने बताया कि एंबुलेंस वालों ने बताया कि सरकारी अस्प्ताल में इलाज नहीं मिलता इसलिए ड्राइवर और सहयोगी के बताए निजी अस्पताल में मरीज को ले जा रहे। मरीज ले जाने के लिए निजी एंबुलेंस वाले कोई शुल्क भी नहीं ले रहे।

बता दें कि एंबुलेंस संचालकों को शिफ्टिंग का सारा खर्च मरीज की जगह निजी अस्पताल वाले देते हैं। वह भी 5 से 20 हजार रुपए तक…इधर राज्य में 108 एंबुलेंस का संचालन करने वाली जय अंबे इमरजेंसी सर्विसेस के पीआरओ अमित वर्मा अभी देखने-दिखवाने की बात कर रहे हैं।
क्या कहता है नियम
किसी जरुरतमंद का फोन डायल 112 पर आने के बाद वह कॉल 108 को ट्रांसफर हो जाती है। जिसके बाद वहां से कॉल 108 के ईएमटी या ड्राइवर के पास आती है। ड्राइवर मरीज के बताए हुए लोकेशन पर एंबुलेंस लेकर जाता है। वहां से मरीज को लेकर सबसे पहले पास के सरकारी अस्पताल ले जाता है। अगर मरीज की स्थिति गंभीर हुई तो वहां से रिफर करवा जिला या मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाना है। अगर इस दौरान कोई मरीज निजी अस्पताल जाने की जिद करता है तो वह अपनी सुविधा से निजी अस्पताल जा सकता है। ड्रायवर और ईएमटी इसी बात का फायदा उठाते हैं और मरीज और उनके परिजनों को काउंसिलिंग कर कमाई के चक्कर में निजी अस्पताल भेज देते हैं।



