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आकाओं को खुश करने इतिहास से छेड़छाड़ न करें कंगना रनौत, नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पोते ने एक्ट्रेस और भाजपा उम्मीदवार को दी नसीहत

सियासी लाभ के इतिहास को तोड़ना, मरोड़ना सही नहीं -चंद्र कुमार बोस

 

दिल्ली। चुनाव प्रचार क दौरान कही बातों को लेकर कंगना रनौत एक बार फिर से विवादों में आ गईं हैं। जिसके लिए सुभाष चंद्र बोस के पोते चंद्र कुमार बोस ने राजनीतिक लाभ के लिए इतिहास को न तोड़ने मरोड़ने की नसीहत दी है।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पोते चंद्र कुमार बोस ने कंगना के उस दावे की आलोचना की है जिसमें भाजपा प्रत्याशी ने कहा था कि सुभाष चंद्र बोस भारत के पहले प्रधानमंत्री थे। चंद्र कुमार बोस ने कहा कि कंगना को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की लिखी गई पुस्तकों का अध्ययन करना चाहिए।

दरअसल, हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार कंगना रनौत ने एक कार्यक्रम में कहा था कि पहले मुझे यह बात क्लियर करने दीजिए। जब हमें आजादी मिली तो भारत के पहले प्रधानमंत्री सुभाष चंद्र बोस, वो कहां गए थे? इस बयान को लेकर वह आलोचकों के निशाने पर भी आ गई थीं।

चंद्र कुमार बोस ने एक अखबार को दिए intrview में कहा कि कंगना रनौत को अपने राजनीतिक लाभ के लिए या अपने पार्टी नेतृत्व को खुश करने के लिए इतिहास को विकृत नहीं करना चाहिए। जहां तक नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर उनके बयान का सवाल है, तो यह अधूरा है। नेताजी निश्चित रूप से राष्ट्र प्रमुख, अखंड, अविभाजित भारत के प्रधानमंत्री थे। मैं यहां बता दूं कि महत्वपूर्ण कारक एकजुट और अविभाजित भारत है, जिसका जिक्र करने से वह चूक गईं।

चंद्र कुमार बोस ने कहा- नेताजी अविभाजित और अखंड भारत के अंतिम प्रधानमंत्री भी थे। आपको नेताजी के जीवन और समय, उनके द्वारा लिखी गई पुस्तकों का अध्ययन करने की जरूरत है। मैं न केवल कंगना से वरन उन सभी लोगों से, जो नेताजी में रुचि रखते हैं, अनुरोध करूंगा कि वे भारत की उनकी अवधारणा, विचारधारा और देश के लिए उनके नजरिये को समझने के लिए उनके लेखों का अध्ययन करें। चंद्र कुमार बोस 2016 में पश्चिम बंगाल में भाजपा के उपाध्यक्ष थे। उन्होंने पिछले साल पार्टी छोड़ दी थी।

चंद्र कुमार बोस ने कहा कि किसी को भी अपने या पार्टी या राजनीतिक आकाओं के राजनीतिक लाभ के लिए इतिहास को विकृत नहीं करना चाहिए। मेरा मानना है कि स्वतंत्रता आंदोलन 1857 में मंगल पांडे के विद्रोह के साथ शुरू हुआ था। शहीद भगत सिंह, राजगुरु, खुदीराम बोस जैसे कई लोग थे जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना बलिदान दिया। महात्मा गांधी का अहिंसक आंदोलन भी था, जिसका अपना प्रभाव भी था। पंडित जवाहरलाल नेहरू निश्चित रूप से विभाजित भारत के पहले प्रधानमंत्री थे।

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