फेडरेशन के विरोध के बाद बाद बैकफुट पर आई सरकार, एक दिन में आदेश लेना पड़ा वापस
नेतागिरी करने वाले सरकारी कर्मचारी पर कार्रवाई का था आदेश

छत्तीसगढ़ सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के राजनीतिक दल या अन्य संस्था में पद न लेने के आदेश को वापस ले लिया है। फेडरेशन के विरोध के बाद सरकार ने आदेश को स्थगित कर दिया। एक दिन पहले सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने एक ऑर्डर जारी किया था। इसमें कहा गया कि कोई भी सरकारी सेवक किसी भी राजनीतिक दल या किसी भी संस्था में कोई पद नहीं लेगा। और न ही किसी राजनीतिक गतिविधि में शामिल होगा। यदि ऐसा किया तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। जिसका छत्तीसगढ़ अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन से जमकर विरोध किया था।
आदेश के बाद ही विरोध
छग अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन के संयोजक कमल वर्मा ने बताया कि आदेश जारी होते ही विरोध दर्ज करवाया। सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव और उप सचिव अंशिका पांडेय से व्हाट्सएप के माध्यम से संवाद किया। कहा कि भविष्य में इस आदेश का हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के विरोध पर शासन को इस आदेश को वापस लेना पड़ा।
राष्ट्रीय स्तर पर नजीर
राज्य में सकरार के इस आदेश का विरोध कर फेडरेशन ने पूरे देश के लिए नजीर पेश की है। ऐसा माना जा रहा था कि छग के बाद देश के अलग-अलग राज्यों में शासकीय कर्मचारियेां के लिए ऐसे आदेश जारी हो सकते हैं। लेकिन छग के फेडरेशन के विरोध के बाद सरकार पीछे हटी। ऐसे में दूसरे राज्य भी शासकीय सेवकों के विरुद्ध आदेश निकालने से पहले विचार करेंगे।

आदेश की मुख्य बातें
किसी भी प्रकार के राजनीतिक दल या संगठन का सक्रिय सदस्य नहीं होगा।
किसी भी राजनीतिक गतिविधि में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भाग नहीं लेगा।
किसी अन्य शासकीय, अशासकीय संस्था, समिति, संगठन या निकाय में बिना सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के कोई पद धारण नहीं करेगा एवं न ही उक्त के द्वारा आयोजित किसी गतिविधि में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सम्मिलित होगा।
ऐसे किसी पद या दायित्व को ग्रहण नहीं करेगा, जिससे उसके शासकीय कार्यों की निष्पक्षता प्रभावित हो।
. अतः निर्देशित किया जाता है कि समस्त अधिकारी एवं कर्मचारी यह सुनिश्चित करें कि वे उपरोक्त प्रावधानों का कड़ाई से पालन करें। यदि किसी शासकीय सेवक द्वारा इन नियमों का उल्लंघन किया जाता है, तो उसके विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
विभिन्न संस्थाओं के सदस्य होते हैं कर्मचारी
राजनीतिक दलों के सदस्य आमतौर पर सरकारी कर्मचारी नहीं होते। ऑर्डर में यह तो समझ में आया कि सरकारी कर्मचारी किसी राजनीतिक दल के सदस्य होकर या कोई पद लेकर निष्पक्ष काम नहीं कर सकते। लेकिन ऑर्डर में यह भी लिखा कि किसी अन्य शासकीय, अशासकीय संस्था, समिति, संगठन या निकाय में बिना सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के कोई पद धारण नहीं करेगा। इससे यह साफ नहीं होता है कि क्या सरकारी कर्मचारी किसी सामाजिक संस्था या निजी संस्था के कार्यक्रमों में भी भाग नहीं ले सकता। क्योंकि समाज में विभिन्न प्रकार के जातिगत संगठन होते हैं जिनके सदस्य सभी लोग हैं। कर्मचारियों के अपने संगठन होते हैं जैसे अजाक्स, सपाक्स। क्या इनमें भी सरकारी कर्मचारी शामिल नहीं हो पाएंगे। यह बड़ा सवाल था।



