
रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गुरुवार को राजधानी रायपुर स्थित सीएम निवास से वर्चुअल माध्यम से सरगुजा अंचल में आयोजित प्रख्यात अभियंता, दूरदर्शी विचारक व पूर्व सांसद बाबा कार्तिक उरांव के जन्मशताब्दी समारोह में हिस्सा लिया। इस ऐतिहासिक अवसर पर मुख्यमंत्री ने बाबा कार्तिक उरांव की भव्य आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया। साथ ही जनजातीय समाज और जनप्रतिनिधियों की भावनाओं का सम्मान करते हुए शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय, डिगमा (अंबिकापुर) का नामकरण ‘अभियंता बाबा कार्तिक उरांव छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, अंबिकापुर’ करने की बड़ी घोषणा की।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बाबा कार्तिक उरांव का जीवन शिक्षा, संघर्ष, सामाजिक चेतना और जनजातीय अस्मिता की प्रेरक मिसाल है। उन्होंने उस दौर में विदेश से इंजीनियरिंग की उच्च शिक्षा हासिल की जब जनजातीय समाज के लिए बुनियादी संसाधन भी दुर्लभ थे। उन्होंने अपनी मेधा का उपयोग समाज को संगठित करने और विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए किया। सीएम ने विश्वास जताया कि उनके नाम पर स्थापित यह संस्थान युवाओं को तकनीकी उत्कृष्टता और राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करेगा।
सीतापुर को 28 करोड़ की फोरलेन सड़क की सौगात
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने सरगुजा जिले के सीतापुर क्षेत्र में कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए 28 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली महत्वपूर्ण सड़क परियोजना का भूमिपूजन किया। सोनतराई से सूर तक बनने वाली इस 3.82 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क के तैयार होने से सीतापुर नगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों का आवागमन सुगम और सुरक्षित होगा। इससे स्थानीय व्यापार, कृषि उपज के परिवहन और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
पुलिसकर्मियों के लिए नवनिर्मित आवासीय परिसरों का लोकार्पण
मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन द्वारा निर्मित कई आवासीय एवं कल्याणकारी अधोसंरचनाओं का लोकार्पण भी किया। इसमें उदयपुर में नवनिर्मित महिला एनजीओ मेस भवन, 12 अराजपत्रित अधिकारी आवास, 12 प्रधान आरक्षक एवं आरक्षक आवास तथा सीतापुर थाने में 12 प्रधान आरक्षक व आरक्षक आवास शामिल हैं। सीएम साय ने कहा कि कानून-व्यवस्था की रक्षा में तैनात जवानों और अधिकारियों को बेहतर सुविधाएं देना सरकार का दायित्व है, जिससे वे अनुकूल माहौल में अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें।
संसद में गूंजी थी जनजातीय अधिकारों की आवाज
मुख्यमंत्री ने बाबा कार्तिक उरांव के ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने लोकसभा में जनजातीय समाज के संवैधानिक अधिकारों, जल-जंगल-जमीन और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए आजीवन संघर्ष किया। उन्होंने धर्मांतरण के बाद आरक्षण और संवैधानिक लाभों से जुड़े जटिल मुद्दों को भी संसद के पटल पर पूरी प्रखरता से उठाया था।
मुख्यमंत्री साय ने दोहराया कि राज्य सरकार जनजातीय महापुरुषों की विरासत को सहेजने और युवाओं को आधुनिक तकनीकी शिक्षा से जोड़ने के लिए पूरी तरह संकल्पित है, ताकि विकसित भारत के निर्माण में छत्तीसगढ़ अग्रणी भूमिका निभा सके।




