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यूनेस्को की विश्व धरोहर अस्थायी सूची में शामिल हुआ ऐतिहासिक सिरपुर

प्राचीन दक्षिण कोसल की राजधानी को मिली वैश्विक पहचान, समृद्ध ईंट स्थापत्य और बौद्ध विहारों से चमकेगा पर्यटन

छत्तीसगढ़ की गौरवशाली ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक विरासत को अंतरराष्ट्रीय पटल पर एक ऐतिहासिक पहचान मिली है। महासमुंद जिले में महानदी के तट पर स्थित प्राचीन सांस्कृतिक नगरी सिरपुर को संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) की विश्व धरोहर की अस्थायी सूची (Tentative List) में आधिकारिक तौर पर शामिल कर लिया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के प्रयासों से मिली यह उपलब्धि सिरपुर को अंतिम रूप से पूर्ण विश्व धरोहर का दर्जा दिलाने की दिशा में पहला और सबसे अहम पड़ाव मानी जा रही है।

दक्षिण कोसल की प्राचीन राजधानी और सर्वधर्म समभाव की भूमि

प्राचीन काल में ‘श्रीपुर’ के नाम से प्रसिद्ध यह नगर पाण्डुवंशी शासकों के दौर में दक्षिण कोसल की राजधानी रहा है। महाशिवगुप्त बालार्जुन के 57 वर्षों के स्वर्णिम शासनकाल में सिरपुर कला, संस्कृति और अध्यात्म का अंतरराष्ट्रीय केंद्र बना। सातवीं शताब्दी में चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी अपने यात्रा वृतांत में यहाँ 100 बौद्ध संघारामों और 10 हजार भिक्षुओं की उपस्थिति दर्ज की थी। सिरपुर की सबसे अनूठी विशेषता शैव, वैष्णव, बौद्ध और जैन परंपराओं का शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व रही है, जो आज भी भारत की सांस्कृतिक समन्वयवादी परंपरा का जीवंत प्रमाण है।

ईंट स्थापत्य का शिखर: लक्ष्मण मंदिर व विशाल बौद्ध विहार

सिरपुर की पहचान विश्वप्रसिद्ध लक्ष्मण मंदिर से है, जिसका निर्माण लगभग 650 ईस्वी में रानी वासटा ने अपने पति राजा हर्षगुप्त की स्मृति में कराया था। लाल ईंटों से निर्मित यह पंचरथ शैली का मंदिर अपनी अद्भुत नक्काशी और स्थापत्य तकनीक के लिए पूरे भारत में बेजोड़ माना जाता है।

इसके अलावा यहाँ पुरातात्विक उत्खनन में आनंदप्रभु कुटी विहार, स्वास्तिक विहार और विशाल तीवरदेव महाविहार के अवशेष मिले हैं। तीवरदेव महाविहार के प्रवेश द्वार पर पंचतंत्र की प्रसिद्ध कहानियों (जैसे बंदर और मगरमच्छ) की सूक्ष्म नक्काशी और उन्नत भूमिगत जल निकासी प्रणाली तत्कालीन स्थापत्य प्रतिभा को प्रदर्शित करती है।

2,000 से अधिक पुरावशेष और वैश्विक पर्यटन की उम्मीदें

उत्खनन के दौरान प्राप्त दुर्लभ धातु प्रतिमाएं, चीनी सम्राट काई युवान के काल का सिक्का और प्राचीन आभूषण सिरपुर के वैश्विक व्यापारिक संपर्कों की गवाही देते हैं। यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल होने से सिरपुर अब अंतरराष्ट्रीय बौद्ध पर्यटन सर्किट से सीधे जुड़ सकेगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार, होटल, हस्तशिल्प और पर्यटन व्यवसाय को ऐतिहासिक रफ्तार मिलेगी।

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