
दशकों तक बारूद और आईईडी धमाकों का संताप झेलने वाले बस्तर अंचल में अब विकास, पुनर्वास और मानवीय संवेदना का नया सूरज उग चुका है। केंद्र सरकार के सहयोग से नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों और दिव्यांगजनों को सम्मानजनक जीवन देने के लिए एक महा-अभियान की शुरुआत हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में संचालित ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत दंतेवाड़ा में तीन दिवसीय निःशुल्क दिव्यांगजन कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण शिविर का आगाज हुआ।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस गरिमामयी समारोह में शामिल हुए।
घावों पर मरहम लगाना और पुनर्वास हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता: अमित शाह
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शिविर के दूसरे चरण का शुभारंभ करते हुए कहा कि मोदी सरकार ने देश से नक्सलवाद समाप्त करने का जो संकल्प लिया था, वह पूरा हो चुका है। अब सबसे बड़ी चुनौती नक्सलवाद के मिले घावों पर मरहम लगाने और पीड़ितों को सम्मानपूर्ण आजीविका देने की है। उन्होंने कहा, “नक्सलवाद ने पांच दशकों तक बस्तर के गरीब आदिवासियों को असीम पीड़ा दी है। इस हिंसा की हर निशानी मिटाकर बस्तर को फिर से हँसता-खेलता और खुशहाल बनाना है। पीड़ितों के पुनर्वास और आत्मनिर्भरता के लिए केंद्र सरकार, छत्तीसगढ़ सरकार के साथ चट्टान की तरह खड़ी है।”
गृह मंत्री ने बताया कि 8,526 आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास के लिए बैंक खाते, आवास, नौकरियां और कौशल प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है। उन्होंने घोषणा की कि नक्सल अभियान के दौरान स्थापित किए गए 500 से अधिक सुरक्षा शिविरों में से 200 से अधिक शिविरों को अब ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ के रूप में रूपांतरित किया जाएगा। जिन चौकियों पर कभी सुरक्षा बल तैनात रहते थे, वहां अब केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारी बैठकर जनता के विकास का खाका खींचेंगे।
नक्सलमुक्त बस्तर को देश का अग्रणी आदिवासी संभाग बनाएंगे: सीएम साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और जनता के विश्वास के दम पर छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद के दंश से मुक्ति मिली है। उन्होंने कहा कि ‘नियद नेल्लानार’ योजना के जरिए सुदूर वनांचलों तक सड़क, बिजली, पानी, संचार और 431 नए स्कूलों का जाल बिछाया जा चुका है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि नेतानार में पहले ‘सेवा डेरा’ की शुरुआत हो चुकी है, जहां स्थानीय युवाओं और महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई, इमली पैकेजिंग और पारंपरिक ढेंकी चावल उत्पादन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही इंद्रावती नदी पर देउरगांव और मटनार में 2,000 करोड़ रुपये की बड़ी सिंचाई परियोजनाओं से 80 हजार एकड़ भूमि सिंचित होगी, जिससे किसानों की आय दोगुनी होगी।
768 दिव्यांगों के चेहरों पर लौटी मुस्कान
दंतेवाड़ा में 15 से 17 अक्टूबर तक चलने वाले इस शिविर में दंतेवाड़ा के 509, बीजापुर के 197 और सुकमा के 62 सहित कुल 768 दिव्यांगजनों को व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, श्रवण यंत्र और अत्याधुनिक कृत्रिम अंग वितरित किए जा रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री ने आईईडी ब्लास्ट में पैर गंवाने वाले सुकमा के जवान मड़काम मुन्ना और बीजापुर के ग्रामीण चंद्रैया सपका से बातचीत की। दोनों ने कृत्रिम पैर मिलने के बाद दोबारा चलने-फिरने पर भावुक होकर शासन का आभार जताया।





