CM विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मिली नई पहचान
छत्तीसगढ़ के इस हेल्थ सेंटर ने बनाया राष्ट्रीय रिकॉर्ड, 88.57% अंक लेकर हासिल किया बड़ा सम्मान, आयुष्मान आरोग्य मंदिर चनाडोंगरी बना गुणवत्ता का मॉडल

छत्तीसगढ़ की ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के विकासखंड गौरेला स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर चनाडोंगरी ने राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) के तहत 88.57 प्रतिशत अंक हासिल कर राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन प्राप्त किया है। यह उपलब्धि बताती है कि अब गांवों में भी राष्ट्रीय स्तर की स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार लगातार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने पर काम कर रही है। इसका असर अब जमीन पर दिखाई देने लगा है। गुणवत्तापूर्ण इलाज, बेहतर प्रबंधन और मरीजों को केंद्र में रखकर विकसित की गई स्वास्थ्य व्यवस्था की वजह से चनाडोंगरी का यह स्वास्थ्य केंद्र पूरे प्रदेश के लिए मिसाल बन गया है।
राष्ट्रीय स्तर की मूल्यांकन टीम ने स्वास्थ्य केंद्र का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान मरीजों की संतुष्टि, स्वच्छता, रिकॉर्ड संधारण, दवाओं की उपलब्धता, मानव संसाधन प्रबंधन, अधोसंरचना, जैव-चिकित्सीय अपशिष्ट प्रबंधन और सामुदायिक सहभागिता जैसे कई महत्वपूर्ण मानकों पर मूल्यांकन किया गया। सभी मानकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए केंद्र ने 88.57 प्रतिशत अंक अर्जित किए और राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन हासिल कर लिया।
आयुष्मान आरोग्य मंदिर चनाडोंगरी में ग्रामीणों को प्रतिदिन व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। यहां ओपीडी सेवा, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं, नियमित टीकाकरण, परिवार नियोजन, गैर-संचारी रोगों की जांच, मानसिक स्वास्थ्य परामर्श, टेलीमेडिसिन सुविधा, स्वास्थ्य जागरूकता अभियान, निःशुल्क दवा वितरण और आवश्यक जांच जैसी सुविधाएं नियमित रूप से संचालित हो रही हैं।
इन सेवाओं का सबसे बड़ा लाभ आसपास के गांवों के लोगों को मिल रहा है। अब बेहतर इलाज के लिए उन्हें दूर शहरों के अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ता। स्थानीय स्तर पर ही गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिलने से समय और खर्च दोनों की बचत हो रही है। इससे ग्रामीणों का सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसा भी लगातार बढ़ रहा है।
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में अब तक 14 स्वास्थ्य संस्थानों को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक के तहत प्रमाणन मिल चुका है। स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य बाकी संस्थानों को भी इसी स्तर तक पहुंचाना है। इसके लिए लगातार सुधार, प्रशिक्षण और आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं।
राज्य सरकार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने, स्वास्थ्य अधोसंरचना मजबूत करने और ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने पर लगातार निवेश कर रही है। राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन प्राप्त करने वाले स्वास्थ्य संस्थानों की बढ़ती संख्या इस दिशा में हो रही प्रभावी प्रगति का स्पष्ट संकेत है।
आयुष्मान आरोग्य मंदिर चनाडोंगरी की यह उपलब्धि सिर्फ एक स्वास्थ्य केंद्र की सफलता नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था के बदलते स्वरूप की पहचान है। यह प्रमाणन बताता है कि गुणवत्ता, पारदर्शिता, जवाबदेही और जनविश्वास के आधार पर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं अब राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नई पहचान बना रही हैं।



