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80% बोनी पूरी, 9.95 लाख टन खाद बंटी: खरीफ सीजन ने पकड़ ली रफ्तार

सरकार ने अफसरों को चेताया, खाद-बीज की सप्लाई में किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं होगी

छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन ने रफ्तार पकड़ ली है। 28 जुलाई तक प्रदेश में 48.69 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 39.09 लाख हेक्टेयर यानी 80 फीसदी क्षेत्र में बोनी पूरी हो चुकी है। धान से लेकर मक्का, कोदो, कुटकी, अरहर, मूंग, मूंगफली और रामतिल जैसी फसलों की बुवाई तेज़ी से चल रही है। अच्छी बारिश ने किसानों का भरोसा बढ़ाया है, लेकिन सरकार ने साफ कर दिया है कि खाद-बीज की सप्लाई में किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं होगी।

CM का सख्त संदेश

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कृषि विभाग के अधिकारियों को दो टूक निर्देश दिए हैं कि किसानों को मांग के मुताबिक प्रमाणित खाद और बीज समय पर उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि वितरण व्यवस्था में लापरवाही मिली तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई होगी। साथ ही सभी सहकारी समितियों में पर्याप्त खाद-बीज का भंडारण रखने और पूरी व्यवस्था की लगातार निगरानी करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

खाद-बीज का बड़ा दावा

कृषि विभाग के मुताबिक अब तक किसानों को 9.95 लाख मीट्रिक टन उर्वरक और 4.38 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरित किए जा चुके हैं। बीज वितरण के मामले में सरकार ने 4.95 लाख क्विंटल का लक्ष्य रखा था, जबकि 4.75 लाख क्विंटल का भंडारण पहले ही कर लिया गया। अब तक लक्ष्य का 88 फीसदी बीज किसानों तक पहुंच चुका है। पिछले साल इसी अवधि में 4.31 लाख क्विंटल बीज का वितरण हुआ था। यानी इस बार वितरण में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

बारिश ने बढ़ाया भरोसा

मानसून की अच्छी बारिश ने खेती को गति दी है। 28 जुलाई की सुबह तक प्रदेश में औसतन 447.1 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। हालांकि यह प्रदेश की औसत वार्षिक वर्षा 1246.3 मिमी से अभी काफी कम है, लेकिन शुरुआती बारिश ने किसानों को समय पर बोनी का मौका दे दिया। इसी वजह से अधिकांश जिलों में बुवाई का काम तेजी से आगे बढ़ा है।

खाद का बड़ा स्टॉक

सरकार ने इस खरीफ सीजन में 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक वितरण का लक्ष्य रखा है। इसके मुकाबले सहकारी और निजी क्षेत्रों में 14.95 लाख मीट्रिक टन खाद का भंडारण किया गया है। इसी स्टॉक में से अब तक 9.95 लाख मीट्रिक टन उर्वरक किसानों को वितरित किए जा चुके हैं, जो कुल लक्ष्य का 64 प्रतिशत है। सरकार का दावा है कि जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त आपूर्ति की भी व्यवस्था रहेगी।

कर्ज भी रिकॉर्ड स्तर पर

खेती के लिए किसानों को आर्थिक मदद देने में भी सरकार ने रफ्तार दिखाई है। किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए 27 जुलाई तक 6931.51 करोड़ रुपए का अल्पकालीन कृषि ऋण बांटा जा चुका है। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 5691.72 करोड़ रुपए था। यानी इस बार करीब 1240 करोड़ रुपए अधिक ऋण किसानों तक पहुंचा है। पूरे खरीफ सीजन में सरकार ने 8800 करोड़ रुपए का कृषि ऋण वितरण करने का लक्ष्य तय किया है।

अब परीक्षा निगरानी की

सरकार के आंकड़े राहत देने वाले जरूर हैं, लेकिन असली परीक्षा अब वितरण व्यवस्था की है। हर साल खाद की कमी, कालाबाजारी और समितियों में लंबी कतारें किसानों की परेशानी बनती रही हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री की सख्ती के बाद निगाहें कृषि विभाग पर टिक गई हैं। यदि खेत तक समय पर खाद और बीज पहुंचा तो अच्छी बारिश के साथ प्रदेश रिकॉर्ड उत्पादन की ओर बढ़ सकता है, लेकिन सप्लाई सिस्टम लड़खड़ाया तो सरकारी दावों पर भी सवाल उठना तय है।

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