
रायपुर। स्मार्ट मीटर लगते ही बिजली का बिल बढ़ जाता है… पिछले कई महीनों से यही सबसे बड़ा सवाल और सबसे बड़ी बहस बनी हुई थी। सोशल मीडिया पर तरह-तरह के दावे किए जा रहे थे। लेकिन अब छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने तीन बड़े शहरों के लाखों उपभोक्ताओं के आंकड़ों का तुलनात्मक अध्ययन जारी कर दावा किया है कि स्मार्ट मीटर बिजली की खपत नहीं बढ़ाता, बल्कि वास्तविक खपत ही बिल तय करती है। कंपनी का कहना है कि मई, जून और जुलाई 2026 के अध्ययन में अधिकांश उपभोक्ताओं की बिजली खपत जुलाई में उल्लेखनीय रूप से कम दर्ज हुई है।
बिजली कंपनी ने रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग के स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के तीन महीने के आंकड़ों का विश्लेषण किया। रिपोर्ट का सबसे बड़ा निष्कर्ष यह है कि जिन उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगे हैं, उनकी खपत जुलाई में स्वतः कम हो गई। यदि स्मार्ट मीटर ही अधिक यूनिट दर्ज कर रहे होते तो जुलाई में खपत कम नहीं होती। कंपनी का दावा है कि इससे यह स्पष्ट होता है कि बिजली का बिल मीटर नहीं, बल्कि उपभोक्ता के वास्तविक उपयोग से तय होता है।
रायपुर के आंकड़े सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। यहां 3 लाख 11 हजार 374 घरेलू स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। 1 जून से 26 जून 2026 के बीच कुल बिजली खपत करीब 10.85 करोड़ यूनिट दर्ज हुई थी। लेकिन 1 जुलाई से 26 जुलाई के बीच यही खपत घटकर करीब 7.77 करोड़ यूनिट रह गई। यानी सिर्फ एक महीने में लगभग 28 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई।
सबसे दिलचस्प आंकड़े उन उपभोक्ताओं के सामने आए जिनकी मासिक खपत 400 यूनिट से अधिक रहती है। ऐसे 1 लाख 21 हजार 135 उपभोक्ताओं के बिलों का विश्लेषण करने पर पाया गया कि जुलाई में उनकी बिजली खपत लगभग 44 प्रतिशत कम हो गई। कंपनी का कहना है कि यदि स्मार्ट मीटर ही अतिरिक्त यूनिट जोड़ रहे होते तो इतनी बड़ी गिरावट संभव नहीं थी।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि जिन घरों में अभी तक स्मार्ट मीटर नहीं लगे हैं, वहां भी अप्रैल, मई और जून में पिछले साल की तुलना में बिजली खपत बढ़ी थी और जुलाई में वही खपत कम हो गई। यानी मौसम और बिजली उपकरणों के उपयोग का सीधा असर बिजली खपत पर पड़ा, न कि मीटर के प्रकार का।
कंपनी ने कुछ वास्तविक उदाहरण भी साझा किए हैं। रायपुर के अवंती विहार, राजीव नगर और कचना क्षेत्र के उपभोक्ताओं के पिछले वर्ष और इस वर्ष के आंकड़ों में अप्रैल, मई और जून के दौरान बिजली खपत में बड़ी वृद्धि दर्ज हुई। इन उदाहरणों के जरिए बिजली कंपनी ने यह समझाने की कोशिश की है कि गर्मी के मौसम में एसी, कूलर और अन्य उपकरणों के अधिक उपयोग से बिजली खपत स्वाभाविक रूप से बढ़ती है।
दुर्ग के आंकड़े भी इसी दावे को मजबूत करते हैं। यहां 400 यूनिट से अधिक बिजली खपत वाले 240 स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं का अध्ययन किया गया। मई में कुल खपत 1 लाख 75 हजार 451 यूनिट, जून में 1 लाख 65 हजार 411 यूनिट और जुलाई में घटकर सिर्फ 76 हजार 257 यूनिट रह गई। यानी जुलाई में करीब 53 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
बिलासपुर सिटी सर्किल का विश्लेषण भी लगभग यही तस्वीर दिखाता है। यहां 400 यूनिट से अधिक मासिक खपत वाले 9 हजार 717 स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं का अध्ययन किया गया। मई में औसत खपत 524 यूनिट, जून में 596 यूनिट और जुलाई में घटकर 312 यूनिट रह गई। यानी यहां भी लगभग 43 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई।
बिजली कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन उपभोक्ताओं की खपत 400 यूनिट से अधिक रहती है, वे मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन अभियान योजना का लाभ नहीं ले पाते। ऐसे उपभोक्ताओं के बिल स्वाभाविक रूप से अधिक आते हैं। लेकिन जुलाई में खपत कम होने के कारण अगस्त में मिलने वाले बिजली बिलों में राहत मिलने की संभावना है और अधिक उपभोक्ता योजना के दायरे में भी आ सकते हैं।
एक और बड़ा कारण “सप्लाई अफोर्डिंग चार्ज” को बताया गया। कंपनी के अनुसार जिन उपभोक्ताओं ने अपने स्वीकृत विद्युत भार से अधिक बिजली का लगातार उपयोग किया, उनके बिल में अतिरिक्त राशि जुड़ रही थी। अब इस व्यवस्था में बदलाव किया गया है। नई व्यवस्था के तहत यह अतिरिक्त राशि वर्ष में केवल एक बार, दिसंबर के बिल (जो जनवरी में जारी होगा) में ही जोड़ी जाएगी। इससे उपभोक्ताओं को हर महीने अतिरिक्त भुगतान नहीं करना पड़ेगा।
बिजली कंपनी ने उपभोक्ताओं से “मोर बिजली ऐप” का उपयोग करने की भी अपील की है। स्मार्ट मीटर वाले उपभोक्ता इस ऐप के माध्यम से अपनी प्रतिदिन और हर आधे घंटे की बिजली खपत देख सकते हैं। इससे यह पता चल सकेगा कि किस समय सबसे ज्यादा बिजली खर्च हो रही है और अनावश्यक खपत पर नियंत्रण भी आसान होगा। सामान्य मीटर वाले उपभोक्ता भी ऐप पर अपनी मासिक खपत देख सकते हैं।
स्मार्ट मीटर की सटीकता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच कंपनी ने बताया कि अब तक 4500 चेक मीटर लगाए जा चुके हैं। इन सभी मामलों में चेक मीटर और स्मार्ट मीटर में दर्ज बिजली खपत समान पाई गई। यदि किसी उपभोक्ता को फिर भी संदेह हो तो विभाग जांच के लिए चेक मीटर लगाने की सुविधा भी उपलब्ध करा रहा है।
बिजली बिल या स्मार्ट मीटर से जुड़ी किसी भी शिकायत के लिए उपभोक्ता टोल फ्री नंबर 1912 पर संपर्क कर सकते हैं। कंपनी ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से फैल रही भ्रामक सूचनाओं पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक आंकड़ों व डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर ही अपनी राय बनाएं। बिजली वितरण कंपनी का कहना है कि पारदर्शिता बनाए रखते हुए आगे भी सभी तथ्य सार्वजनिक किए जाएंगे ताकि स्मार्ट मीटर को लेकर किसी भी तरह का भ्रम पूरी तरह खत्म हो सके।




