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Buxar Lok Sabha Result 2024: बक्सर में BJP को किसने हराया, खुला राज; सियासी हलचल तेज

बक्सर । बीजेपी का गढ़ कहे जानेवाले बक्सर लोकसभा चुनाव में बीजेपी की हार पर से पर्दा उठता जा रहा है। बक्सर से चुनावी मैदान में उतरे युवा नेता मिथिलेश तिवारी को राजद उम्मीदवार सुधाकर सिंह ने करीब 30 हजार मतों से पराजित किया है। यह 30 हजार की सेंधमारी में किसका किसका कितना रोल रहा, इसपर से धीरे धीरे परदा हटता जा रहा है।

गत दो लगातार लोकसभा चुनाव में 1 लाख से अधिक मतों से जीतनेवाली भाजपा को मोदी वेव के बावजूद बेहद कड़े मुकाबले का सामना करने के पीछे दो मुख्य वजह रही है। एक, निर्दलीय उम्मीदवार पूर्व आईपीएस आनंद मिश्र ने भाजपा का वोट काटा और बीजेपी के सामने संकट पैदा किया। दूसरा, भाजपा की अंदरूनी कलह और भाजपा के कद्दावर नेताओं का असहयोग आन्दोलन।

निर्दलीय उम्मीदवार पूर्व आईपीएस आनंद मिश्र ने बिगाड़ा सामाजिक समीकरण

ब्राह्मण बाहुल्य कहे जानेवाले बक्सर लोकसभा सीट में भाजपा के कोर वोटर ब्राह्मण समाज रहा है। यहां से निर्दलीय उम्मीदवार पूर्व आईपीएस आनंद मिश्र भी ब्राह्मण समाज से आते हैं। उन्होंने करीब 48 हजार वोट प्राप्त किया जबकि भाजपा उम्मीदवार मिथिलेश तिवारी की हार 30 हजार से हुई । इसे भाजपा संकट में आ गया।

भाजपा के कद्दावरों ने डुबाया नैया

पूर्व सांसद व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने अपने कार्यकाल में जिन्हे भाजपा के संगठन का दायित्व दिया था, वे सभी कमोबेश निष्क्रिय दिखे। एक प्रवासी अधिकारी ने नाम नहीं उजागर करने की शर्त पर आरोप लगाते हुए बताया कि श्री चौबे के इशारे पर यह सब हो रहा था। वही पूर्व मंत्री श्री अश्विनी चौबे के राजनैतिक विरोधी रहे भाजपा से निष्कासित पूर्व भाजपा जिला अध्यक्ष राणा प्रताप सिंह ने नए उम्मीदवार मिथिलेश तिवारी को सहयोग करने की बजाय निर्दलीय उम्मीदवार आईपीएस आनंद मिश्र के खेमे में चले गए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 25 मई के आने के बाद श्री सिंह की वापसी हुई। पूर्व अध्यक्ष राणा प्रताप सिंह ने 26 मई को एक प्रेस कांफ्रेंस में भाजपा उम्मीदवार मिथिलेश तिवारी को समर्थन दिया। परंतु यह प्रयास जीत में नही बदल पाया।

एक तरफ जिला भाजपा की वर्तमान टीम की कार्यनीति सवालों के घेरे में था वही दूसरी तरफ पूर्व मंत्री अश्विनी चौबे के राजनैतिक दुश्मन भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष राणा प्रताप सिंह ने भी समय पूर्व साथ नही दिया। इस प्रकार जिला भाजपा की वर्तमान और निवर्तमान कार्यकारिणी टीम और संबंधित बड़े नेताओं की उदासीनता ने पूरा खेल बिगाड़ दिया।

भाजपा की चुनावी रणनीति भी हार की रही जिम्मेदार 

किसी भी चुनाव की रणनीति विपरीत परिस्थितियों में भी चुनाव को अपने पक्ष में कर लेती है। परंतु बक्सर चुनाव ऐसी रणनीति से इतर बिखरी रणनीति की तरह दिखी। अगर सामाजिक समीकरण को ध्यान में रखकर रणनीति पर बात की जाय तो भाजपा ब्राह्मण, भूमिहार और राजपूत के करीब 35 प्रतिशत पर काम तो की परंतु एससी, एसटी के करीब 40 प्रतिशत पर उसका ध्यान भटक गया। वही, वोटर को रिझानेवाली मजबूत टीम मंडल स्तर तक पहुंची परंतु वोटर तक नहीं पहुंच पाएं। कार्यकर्ताओं की जंबो टीम होने के बावजूद उन्हें शक्ति केंद्र स्तर तक नियोजन नही किया जा सका। इस बार पहली बार प्रवासी टीम ने बूथ स्तर के कार्यकर्ता तक पहुंच बनाई परंतु वर्तमान भाजपा कार्यकारिणी ने जनता तक पहुंच बनाने से परहेज किया।भाजपा प्रत्याशी मिथिलेश तिवारी का चुनावी दौरा भी योजना से नहीं होता था। वे जहां जाते वहां स्थानीय हालात और सामाजिक समीकरण के अनुसार बेहतर इनपुट नही दिया गया। जबकि यह काम जिला भाजपा संगठन का था।

 

 

 

 

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