
छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय लोक परंपरा, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार में देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु शामिल होंगी। राज्य के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के आमंत्रण को स्वीकार करते हुए राष्ट्रपति ने 23 अक्टूबर को जगदलपुर में आयोजित होने वाले इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति की सहमति दे दी है। राष्ट्रपति की यह सहभागिता बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को राष्ट्रीय पटल पर नई प्रतिष्ठा दिलाएगी।
मां दंतेश्वरी को समर्पित ऐतिहासिक बस्तर दशहरा अपनी अनूठी जनजातीय रीतियों, अटूट लोक आस्था और जनभागीदारी के लिए विश्वभर में विशिष्ट पहचान रखता है। इस बहुदिवसीय उत्सव की परंपराओं में मुरिया दरबार का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह आयोजन सदियों से बस्तर की सामाजिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था की जीवंत अभिव्यक्ति रहा है, जिसके माध्यम से स्थानीय समुदाय, परंपरा के संवाहकों और जन प्रतिनिधियों के बीच सीधा और पारदर्शी संवाद स्थापित होता है।
बस्तर की सामाजिक व्यवस्था और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में मांझी एवं चालकी जैसे पारंपरिक पदों का योगदान बेहद अहम रहा है। मुरिया दरबार के जरिए इन पारंपरिक प्रतिनिधियों की समस्याओं, सुझावों और सामुदायिक विषयों पर गंभीर विमर्श की परंपरा निभाई जाती है। राष्ट्रपति का इस दरबार में सम्मिलित होना बस्तर की प्राचीन लोकतांत्रिक और सामुदायिक परंपराओं का बड़ा सम्मान माना जा रहा है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का बस्तर अंचल की संस्कृति और प्राकृतिक धरोहर से निरंतर गहरा जुड़ाव रहा है। इससे पूर्व जगदलपुर प्रवास के दौरान उन्होंने बस्तर के जलप्रपातों, प्राचीन गुफाओं और प्राकृतिक संपदा को पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत मूल्यवान बताते हुए जनजातीय संस्कृति को आधुनिक विकास के साथ संरक्षित रखने का आह्वान किया था। साथ ही, बस्तर के प्रतिनिधिमंडल से संवाद में भी उन्होंने क्षेत्रीय पहचान और सांस्कृतिक मूल्यों के संवर्धन पर निरंतर बल दिया है।
मुरिया दरबार में राष्ट्रपति का आगमन पूरे राज्य के लिए गर्व का क्षण बनेगा। राज्य शासन बस्तर की समृद्ध विरासत और लोक कलाओं को सहेजने के साथ-साथ पर्यटन के माध्यम से स्थानीय समुदाय के लिए आजीविका और आर्थिक अवसरों के विस्तार पर निरंतर कार्य कर रहा है। बस्तर दशहरा के इस महत्वपूर्ण पड़ाव पर राष्ट्रपति की मौजूदगी लोक आस्था और जनजातीय गौरव को सुदृढ़ करेगी।





