छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में 50 प्रतिशत गरीब बच्चे बीच में ही छोड़ रहे स्कूल, आंकड़े देख साय सरकार ने प्राइवेट स्कूलों पर कसा शिकंजा, कमेटी बनाने के निर्देश

रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, जांजगीर के बड़े स्कूल कर रहे मनमानी

 

छत्तीसगढ़ में हर साल 50 परसेंट बच्चे स्कूल छोड़ देते हैं। ये पिछले तीन शैक्षणिक सत्रों से हो रहा है। पिछले सत्र 2023-24 में 48 हजार गरीब बच्चों ने आरटीई के तहत प्रायवेट स्कूलों में दाखिला लिया था। इनमें से 24 हजार बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया। जानकारी कलेक्टरों द्वारा प्रायवेट स्कूलों में आरटीई पर मिली रिपोर्ट में हुआ है।

रिपोर्ट सामने आने के बाद ही छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव सरकार ने प्रायवेट स्कूलों पर शिकंजा कसते हुए आदेश जारी किया है। सामान्य प्रशासन विभाग से जारी आदेश के अनुसार कलेक्टर की अध्यक्षता में हर जिले में नौ सदस्यीय जिला स्तरीय कमेटी बनाई जाएगी। इनमें जिला पंचायत के सीईओ, नगर निगमों के कमिश्नर, डीईओ समेत एक स्कूल के प्राचार्य और पालक शामिल होंगे।

छह बिंदुओं पर फोकस

जिला स्तरीय कमेटी में एसपी को इसलिए रखा गया है कि प्रायवेट स्कूल मनमानी न कर सकें। फर्जीवाड़ा करने वाले स्कूलों के खिलाफ अपराधिक मुकदमा दर्ज किया जा सके।

RTE की हालत नाजुक
फीडबैक के बाद आरटीई में सबसे अधिक बच्चे छत्तीसगढ़ के ड्रॉप आउट ले रहे हैं। शहरों में ड्रॉप आउट होने वाले बच्चों में रायपुर, बिलासपुर, कोरबा और जांजगीर शामिल हैं। रायपुर में सबसे अधिक 2496 गरीब बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया। राज्य सरकार का भी मुख्य फोकस इन बड़े शहरों के बड़े स्कूलों पर है। 60 से 70 परसेंट आरटीई वाले बच्चे इन्हीं शहरों के प्रायवेट स्कूलों में पढ़ते हैं। जानकारी में बाद स्कूल शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने कलेक्टरों को पत्र लिखकर इसकी जांच करने कहा था। उन्होंने 15 दिन के भीतर प्रायवेट स्कूलों के साथ मीटिंग कर ड्रॉप आउट बच्चों की संख्या का पता लगाने के निर्देश दिए थे। उन्होंने यह भी कहा था कि प्रायवेट स्कूलों में महंगे यूनिफार्म, पुस्तकों की वजह से तो बच्चे स्कूल नहीं छोड़ रहे, इसकी भी जांच की जाए। कलेक्टरों ने सरकार को ड्रॉप आउट बच्चों की रिपोर्ट भेज दी है।

तीन साल की रिपोर्ट से सरकार की परेशानी
छत्तीसगढ़ में प्रायवेट स्कूलों द्वारा गरीब बच्चों को प्रोटेक्शन न दिए जाने की वजह से आधे से अधिक बच्चे स्कूल छोड़ दे रहे। पिछले तीन सत्रों में ड्रॉप आउट लेने वाले बच्चों की संख्या वाली कलेक्टरों की रिपोर्ट लगी है, जिसमे 2020-21 में 10 हजार, 2021-22 में 18 हजार और 2023-24 में 24 हजार गरीब बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया। पिछले सत्र याने 2023-24 में छत्तीसगढ के प्रायवेट स्कूलों में 48 हजार गरीब बच्चों के दाखिले हुए थे।

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