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विदेशी ताकतों ने समाज तोड़ा, वनवासी संस्कृति बचाना हमारी जिम्मेदारी: डॉ. पूर्णेन्दु सक्सेना

रायपुर में रक्षाबंधन उत्सव में धर्मांतरण पर उठे सवाल, 300 से ज्यादा लोगों ने जनजातीय बहनों से बंधवाया रक्षासूत्र

रायपुर। वनवासी समाज की संस्कृति और परंपराओं को लेकर रायपुर में आयोजित रक्षाबंधन उत्सव में धर्मांतरण का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मध्यक्षेत्र के क्षेत्रीय संघचालक डॉ. पूर्णेन्दु सक्सेना ने कहा कि धर्मांतरण की आड़ में विदेशी शक्तियों ने वनवासी समाज के सहज विश्वास को चोट पहुंचाकर उसे तोड़ने का काम किया है। उन्होंने कहा कि वनवासी संस्कृति की रक्षा सिर्फ किसी एक वर्ग की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

धर्मांतरण पर सीधा हमला

वनवासी विकास समिति रायपुर महानगर ने 6 सितंबर को शबरी कन्या आश्रम छात्रावास में भव्य रक्षाबंधन उत्सव आयोजित किया। मुख्य वक्ता डॉ. सक्सेना ने कहा कि भारत की पहचान ही एक-दूसरे की मान्यताओं और परंपराओं की रक्षा करने से है। वनवासी समाज की प्रकृति-पूजक जीवनशैली देश की बड़ी ताकत है। इसे बचाना जरूरी है।

प्रलोभन पर भी सवाल

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक भीम सिंह कंवर ने धर्मांतरण को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में सुख-सुविधाओं और प्रलोभन के जरिए धर्मांतरण की कोशिशें की गईं। उन्होंने कहा कि परिवार व्यवस्था और प्रकृति पूजा वनवासी समाज की सबसे बड़ी ताकत है। अगर प्रलोभन का खेल नहीं रुका तो आने वाले समय में समाज संकट में आ सकता है।

बेटियों की शिक्षा पर जोर

विशिष्ट अतिथि आदर्शिनी महिला मंडल की अध्यक्ष मंजुला कंवर ने शबरी कन्या आश्रम की व्यवस्थाओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि वनवासी बेटियों को संस्कार और शिक्षा के साथ आगे बढ़ाने का काम अनुकरणीय है। समाज को इन बेटियों के भविष्य और सुरक्षा के लिए आगे आना चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता वनवासी विकास समिति के महानगर अध्यक्ष रवि गोयल ने की।

पूर्वोत्तर की छात्राओं ने बांधा समां

कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार और दीप प्रज्वलन से हुई। इसके बाद शबरी कन्या आश्रम में रह रही पूर्वोत्तर की छात्राओं ने समूह गीत और पारंपरिक लोकनृत्य पेश किया। प्रस्तुतियों ने पूरे पंडाल का माहौल बदल दिया। तालियों की गड़गड़ाहट से कार्यक्रम स्थल गूंज उठा।

‘शबरी के बेर’ का विमोचन

उत्सव के दौरान आश्रम की छात्राओं द्वारा स्वरचित और हस्तलिखित पुस्तक ‘शबरी के बेर’ का विमोचन भी किया गया। छात्राओं की रचनात्मकता और उनकी मेहनत को उपस्थित लोगों ने सराहा। आयोजकों ने इसे छात्राओं की प्रतिभा और आत्मविश्वास का उदाहरण बताया।

300 से ज्यादा लोगों ने लिया संकल्प

कार्यक्रम में रायपुर के 300 से ज्यादा गणमान्य नागरिक, डॉक्टर, प्राध्यापक और विद्यार्थी शामिल हुए। जनजातीय बहनों ने अतिथियों को तिलक लगाया और रक्षासूत्र बांधा। इसके बदले उपस्थित लोगों ने बहनों की सुरक्षा, शिक्षा और स्वावलंबन में सहयोग का संकल्प लिया।

वंदेमातरम के साथ समापन

कार्यक्रम का संचालन प्राची भगत ने किया। सिद्धी दलवी ने प्रस्तावना और अस्मिता दीदी ने आश्रम का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। महानगर सचिव प्रवीण अग्रवाल ने आभार जताया। सामूहिक वंदेमातरम के साथ कार्यक्रम समाप्त हुआ। इसके बाद सभी ने सहभोज में हिस्सा लिया।

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